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  • 1महादेवी वर्मा और उनकी छायावादी पहचान
  • 220वीं सदी के प्रारंभिक स्त्री-शिक्षा का इतिहास
  • 3हिन्दू-मुस्लिम साझा संस्कृति
  • 4सुभद्रा कुमारी चौहान से मित्रता का संदर्भ
  • 5आत्मकथात्मक संस्मरण की शैली
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Why this chapter matters
छायावादी कवयित्री महादेवी वर्मा का यह संस्मरण 20वीं सदी के प्रारंभिक भारत की झलक देता है — स्त्री-शिक्षा, हिन्दू-मुस्लिम एकता, सरल बचपन। आज भी प्रासंगिक।

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मेरे बचपन के दिन — कक्षा 9 हिन्दी

1. पाठ परिचय

'मेरे बचपन के दिन' छायावादी कवयित्री महादेवी वर्मा का आत्मकथात्मक संस्मरण है। इसमें उन्होंने अपने बचपन की मधुर स्मृतियाँ साझा की हैं — परिवार, विद्यालय, मित्र, परिवेश। यह पाठ हमें बीसवीं सदी के प्रारंभिक भारत की झलक दिखाता है।

मुख्य विषय

  • बचपन की मधुर स्मृतियाँ
  • स्त्री-शिक्षा का प्रारंभ
  • हिन्दू-मुस्लिम साझा संस्कृति
  • सुभद्रा कुमारी चौहान के साथ मित्रता
  • विद्यालय-जीवन का चित्रण

2. लेखिका — महादेवी वर्मा (1907-1987)

  • जन्म: 26 मार्च 1907, फरुर्खाबाद (उत्तर प्रदेश)
  • मृत्यु: 11 सितंबर 1987
  • हिन्दी की छायावादी कविता की चार स्तंभों में से एक (निराला, पंत, प्रसाद के साथ)
  • उपाधि: 'आधुनिक मीरा'
  • पुरस्कार: ज्ञानपीठ पुरस्कार (1982), पद्मविभूषण (1988, मरणोपरांत)
  • प्रमुख रचनाएँ: 'नीहार', 'रश्मि', 'नीरजा', 'सांध्यगीत', 'दीपशिखा' (कविता); 'पथ के साथी', 'मेरा परिवार' (गद्य)

3. पाठ का सारांश

परिवार

महादेवी जी का परिवार उत्तर प्रदेश के फरुर्खाबाद में था। पिता गोबिंद प्रसाद वर्मा थे — एक शिक्षित, उदार व्यक्ति। माँ हेमरानी देवी थीं।

विद्यालय-जीवन

महादेवी जी ने क्रॉस्थवेट गर्ल्स स्कूल, इलाहाबाद में शिक्षा पाई। उस समय (1910 के दशक में) स्त्री-शिक्षा अभी प्रारंभिक अवस्था में थी। महादेवी जी एक प्रगतिशील स्कूल में पढ़ीं — हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई बच्चे सब साथ थे।

सुभद्रा कुमारी चौहान से मित्रता

स्कूल में उनकी मित्रता सुभद्रा कुमारी चौहान से हुई — जो बाद में 'झाँसी की रानी' कविता की प्रसिद्ध कवयित्री बनीं। दोनों एक-दूसरे की सबसे अच्छी मित्र बनीं।

हिन्दी-उर्दू साझा संस्कृति

पाठ में महादेवी जी ने हिन्दू-मुस्लिम साझेदारी का सुंदर वर्णन किया है। ज़ोहरा बेगम जैसी मित्रों के साथ — कोई धार्मिक भेदभाव नहीं।

बचपन के अनुभव

  • कविता-लेखन का प्रारंभ
  • मेलों में जाना
  • त्योहारों का आनंद
  • घर के पशु-पक्षियों से प्रेम (बिल्ली, चिड़िया)

4. प्रमुख पात्र

  • महादेवी वर्मा: लेखिका, बचपन की स्मृतियाँ साझा करती हैं
  • गोबिंद प्रसाद वर्मा: पिता, उदार, शिक्षित
  • हेमरानी देवी: माँ
  • सुभद्रा कुमारी चौहान: स्कूल की मित्र, बाद में प्रसिद्ध कवयित्री
  • ज़ोहरा बेगम: मुस्लिम मित्र, साझा संस्कृति की प्रतीक
  • मुंशी जी: स्कूल में अध्यापक

5. पाठ के संदेश

  1. स्त्री-शिक्षा का प्रारंभिक संघर्ष
  2. हिन्दू-मुस्लिम एकता का महत्व
  3. बचपन की मधुर स्मृतियाँ जीवन-भर प्रेरणा देती हैं
  4. पारिवारिक संस्कारों का जीवन में महत्व
  5. मित्रता अनमोल पूँजी

6. साहित्यिक विशेषताएँ

  • विधा: आत्मकथात्मक संस्मरण
  • भाषा: सरल, भावपूर्ण, हिन्दी की मधुर शैली
  • तत्व: मार्मिक चित्रण, ऐतिहासिक संदर्भ
  • विशेष: महादेवी जी की कविता-शैली का गद्य में प्रभाव

7. प्रासंगिकता

आज के युग में जब:

  • सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा है,
  • स्त्री-शिक्षा अभी भी संघर्ष है,
  • बचपन डिजिटल हो गया है,

…महादेवी जी का यह संस्मरण हमें सद्भाव, शिक्षा, और सरल बचपन का महत्व याद दिलाता है।

Key formulas & results

Everything you need to memorise, in one card. Screenshot this for revision.

लेखिका
महादेवी वर्मा (1907-1987) — 'आधुनिक मीरा'
छायावाद की चार स्तंभों में से
विधा
आत्मकथात्मक संस्मरण
बचपन की मधुर स्मृतियाँ
पुरस्कार
ज्ञानपीठ 1982 + पद्मविभूषण 1988
हिन्दी के सर्वोच्च सम्मान
मित्र
सुभद्रा कुमारी चौहान — स्कूल की मित्र, 'झाँसी की रानी' कविता की कवयित्री
स्कूल
क्रॉस्थवेट गर्ल्स स्कूल, इलाहाबाद
प्रगतिशील स्कूल
साथी मित्र (मुस्लिम)
ज़ोहरा बेगम — साझा संस्कृति की प्रतीक
छायावाद के चार स्तंभ
जयशंकर प्रसाद + सूर्यकांत त्रिपाठी निराला + सुमित्रानंदन पंत + महादेवी वर्मा
हिन्दी कविता के स्वर्णयुग
⚠️

Common mistakes & fixes

These are the exact errors that cost students marks in board exams. Read them once, save yourself the trouble.

WATCH OUT
महादेवी जी का जन्म-स्थान गलत
26 मार्च 1907, फरुर्खाबाद (उत्तर प्रदेश)। बाद में इलाहाबाद में बस गईं।
WATCH OUT
सुभद्रा कुमारी की भूमिका भूलना
क्रॉस्थवेट स्कूल में महादेवी की मित्र। बाद में 'झाँसी की रानी' (खूब लड़ी मरदानी) कविता की प्रसिद्ध कवयित्री।
WATCH OUT
स्कूल का नाम गलत
क्रॉस्थवेट गर्ल्स स्कूल, इलाहाबाद (Crosthwaite Girls School)। प्रगतिशील संस्थान।

Practice problems

Try each one yourself before tapping "Show solution". Active recall > rereading.

Q1EASY· लेखिका
महादेवी वर्मा को किस उपाधि से जाना जाता है?
Show solution
✦ उत्तर: 'आधुनिक मीरा' — उनकी कविता में मीरा की भक्ति-भावना की झलक है। छायावाद के चार स्तंभों में से एक।
Q2EASY· मित्र
स्कूल में महादेवी जी की कौन प्रसिद्ध मित्र थीं?
Show solution
✦ उत्तर: सुभद्रा कुमारी चौहान — बाद में 'झाँसी की रानी' (खूब लड़ी मरदानी) कविता की प्रसिद्ध कवयित्री।
Q3MEDIUM· विषय
महादेवी जी के बचपन में हिन्दू-मुस्लिम साझा संस्कृति का वर्णन कैसा है?
Show solution
चरण 1 — स्कूल का परिवेश। क्रॉस्थवेट गर्ल्स स्कूल में हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई बच्चे साथ पढ़ते थे। कोई धार्मिक भेदभाव नहीं। चरण 2 — ज़ोहरा बेगम जैसी मित्र। महादेवी जी की एक मित्र ज़ोहरा बेगम थीं। दोनों आपस में बहन की तरह — कोई धार्मिक दीवार नहीं। चरण 3 — साझा त्योहार। त्योहारों में सब साथ शामिल होते — होली-दीवाली पर मुस्लिम मित्र शामिल; ईद पर हिन्दू मित्र। चरण 4 — संदेश। बचपन की यह साझा संस्कृति आज के दौर में और भी महत्वपूर्ण — सांप्रदायिक तनाव के समय में। ✦ उत्तर: महादेवी जी के बचपन में हिन्दू-मुस्लिम साझा संस्कृति थी — स्कूल में हिन्दू-मुस्लिम-ईसाई साथ पढ़ते थे; ज़ोहरा बेगम जैसी मुस्लिम मित्र बहन की तरह थीं; त्योहार साथ मनाते थे। आज के लिए प्रासंगिक संदेश।
Q4MEDIUM· स्त्री-शिक्षा
महादेवी जी के समय में स्त्री-शिक्षा की स्थिति कैसी थी?
Show solution
चरण 1 — संदर्भ। महादेवी जी का बचपन 1910-20 के दशक में था। उस समय भारत में स्त्री-शिक्षा अभी प्रारंभिक अवस्था में थी। चरण 2 — साधारण स्थिति। अधिकांश लड़कियाँ स्कूल नहीं जाती थीं। बाल-विवाह आम था। पर्दा-प्रथा प्रचलित। चरण 3 — प्रगतिशील परिवार। महादेवी जी के पिता गोबिंद प्रसाद वर्मा प्रगतिशील विचारक थे। उन्होंने बेटी को पढ़ने भेजा — दुर्लभ निर्णय उस समय में। चरण 4 — क्रॉस्थवेट स्कूल। इलाहाबाद का क्रॉस्थवेट गर्ल्स स्कूल — एक प्रगतिशील संस्थान जो लड़कियों को शिक्षा देता था। यहाँ हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई बच्चे सब साथ। चरण 5 — परिणाम। महादेवी जी हिन्दी की प्रथम महिला छायावादी कवयित्री बनीं, ज्ञानपीठ पुरस्कार जीता। उनके परिवार और स्कूल का प्रगतिशील रुख महत्वपूर्ण। ✦ उत्तर: 1910-20 के दशक में स्त्री-शिक्षा प्रारंभिक थी — अधिकांश लड़कियाँ स्कूल नहीं जातीं, बाल-विवाह आम। पर महादेवी जी के पिता प्रगतिशील थे — उन्होंने बेटी को पढ़ने भेजा। क्रॉस्थवेट स्कूल में सर्व-धर्म लड़कियाँ साथ पढ़ती थीं। यह प्रगतिशील परिवेश महादेवी जी की सफलता का आधार बना।

5-minute revision

The whole chapter, distilled. Read this the night before the exam.

  • लेखिका: महादेवी वर्मा (1907-1987), 'आधुनिक मीरा'
  • विधा: आत्मकथात्मक संस्मरण
  • जन्म: 26 मार्च 1907, फरुर्खाबाद (UP)
  • स्कूल: क्रॉस्थवेट गर्ल्स स्कूल, इलाहाबाद
  • मित्र: सुभद्रा कुमारी चौहान, ज़ोहरा बेगम
  • पुरस्कार: ज्ञानपीठ 1982, पद्मविभूषण 1988
  • छायावाद के चार स्तंभ: प्रसाद, निराला, पंत, महादेवी
  • प्रमुख रचनाएँ: 'नीहार', 'रश्मि', 'नीरजा', 'सांध्यगीत', 'दीपशिखा'
  • केंद्रीय विषय: स्त्री-शिक्षा + हिन्दू-मुस्लिम एकता + सरल बचपन
  • पिता गोबिंद प्रसाद वर्मा प्रगतिशील — बेटी को शिक्षा दी

CBSE marks blueprint

Where the marks come from in this chapter — so you can plan your prep.

Typical chapter weightage: 4–5 अंक प्रति बोर्ड पेपर

Question typeMarks eachTypical countWhat it tests
बहुविकल्पीय / अति लघु11–2लेखिका; मित्र; स्कूल; उपाधि
लघु उत्तरीय31साझा संस्कृति; स्त्री-शिक्षा; बचपन की स्मृतियाँ
दीर्घ उत्तरीय50–1महादेवी जी के बचपन का सम्पूर्ण चित्रण; संस्मरण की शैली
Prep strategy
  • महादेवी वर्मा — 'आधुनिक मीरा', छायावाद के चार स्तंभों में
  • ज्ञानपीठ 1982, पद्मविभूषण 1988
  • सुभद्रा कुमारी चौहान से मित्रता — 'झाँसी की रानी' कविता की कवयित्री
  • क्रॉस्थवेट गर्ल्स स्कूल, इलाहाबाद
  • हिन्दू-मुस्लिम-ईसाई साझा संस्कृति — ज़ोहरा बेगम जैसी मित्र
  • स्त्री-शिक्षा का प्रारंभिक संघर्ष

Where this shows up in the real world

This chapter isn't just an exam topic — it lives in the world around you.

महादेवी वर्मा अध्ययन केंद्र

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में महादेवी पर अनुसंधान-केंद्र।

स्त्री-शिक्षा इतिहास

महादेवी जी का जीवन भारत में स्त्री-शिक्षा के प्रारंभिक संघर्ष का साक्षी।

हिन्दू-मुस्लिम सद्भाव

उनके संस्मरण आज के सांप्रदायिक तनाव के युग में महत्वपूर्ण संदेश।

Exam strategy

Battle-tested tips from teachers and toppers for this chapter.

  1. महादेवी वर्मा का परिचय — छायावाद, ज्ञानपीठ, पद्मविभूषण
  2. सुभद्रा कुमारी चौहान से मित्रता का संदर्भ
  3. हिन्दू-मुस्लिम साझा संस्कृति पर ज़ोर
  4. स्त्री-शिक्षा का ऐतिहासिक संदर्भ
  5. क्रॉस्थवेट स्कूल का प्रगतिशील स्वरूप

Going beyond the textbook

For olympiad aspirants and curious learners — topics that build on this chapter.

  • छायावाद की अन्य कवयित्रियाँ: सुभद्रा कुमारी चौहान, होमवती चटर्जी
  • हिन्दी की प्रथम महिला रचनाकार: मीरा, अनुभा अग्रवाल
  • स्त्री-लेखन परंपरा: महादेवी से प्रभा खेतान तक

Where else this chapter is tested

CBSE board isn't the only one — other exams test this chapter too.

CBSE Board Class 9उच्च
हिन्दी ओलिंपियाडमध्यम
UGC NET हिन्दीउच्च — छायावाद विशेष

Questions students ask

The real ones — pulled from the Q&A community and tutor sessions.

उनकी कविता में भक्ति-भावना (मीरा की तरह) और रहस्यवादी प्रेम-तत्व हैं। 'नीहार', 'रश्मि' में यह स्पष्ट दिखता है। उन्होंने अविवाहित जीवन व्यतीत किया — मीरा की तरह।

हिन्दी कविता का एक आंदोलन (1918-1936)। प्रकृति-प्रेम, रहस्य-भावना, व्यक्तिवादी अनुभव पर ज़ोर। मुख्य कवि: जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा।
Verified by the tuition.in editorial team
Last reviewed on 18 May 2026. Written and reviewed by subject-matter experts — read about our process.
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