By the end of this chapter you'll be able to…

  • 1राहुल सांकृत्यायन के जीवन और 'महापंडित' उपाधि से परिचय
  • 2तिब्बत यात्रा के मार्ग और कठिनाइयों को समझना
  • 3तिब्बती संस्कृति (यजमान-यजमानी, बौद्ध मठ, मक्खन-चाय) की विशेषताएँ
  • 4डाँडा थोङ्ला, तिङ्ङी, ल्हासा जैसे भौगोलिक स्थानों की पहचान
  • 5यात्रा-वृत्तांत की लेखन-शैली समझना
  • 6साहस, सांस्कृतिक समझ, प्रकृति-प्रेम के मूल्य
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Why this chapter matters
राहुल सांकृत्यायन का यह यात्रा-वृत्तांत साहसिक यात्रा, तिब्बती संस्कृति, बौद्ध परंपरा और हिमालय के भौगोलिक चित्रण का सुंदर उदाहरण है। यात्रा-साहित्य की समझ के लिए महत्वपूर्ण।

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ल्हासा की ओर — कक्षा 9 हिन्दी (क्षितिज भाग 1)

"हमारे आगे डाँडा थोङ्ला आ रहा था। इस ऊँचे पठार पर रास्ता एक हिमालय पहाड़ी पर चढ़कर जाता है।" — राहुल सांकृत्यायन

1. पाठ का परिचय

'ल्हासा की ओर' राहुल सांकृत्यायन के यात्रा-वृत्तांत 'तिब्बत में सवा बरस' का एक अंश है। इस अंश में लेखक ने सन् 1929-30 में नेपाल से तिब्बत की राजधानी ल्हासा तक की अपनी यात्रा का वर्णन किया है। यह यात्रा अत्यंत कठिन और साहसिक थी क्योंकि:

  • तिब्बत में विदेशियों का प्रवेश प्रतिबंधित था।
  • मार्ग बहुत दुर्गम और पहाड़ी था।
  • ऊँचाई, ठंड, हिमपात जैसी प्राकृतिक बाधाएँ थीं।

पाठ की पृष्ठभूमि

  • रचनाकार: राहुल सांकृत्यायन (1893-1963) — 'महापंडित'
  • विधा: यात्रा-वृत्तांत
  • समय-काल: 1929-30 (तिब्बत यात्रा)
  • मूल पुस्तक: 'तिब्बत में सवा बरस'

2. लेखक परिचय — राहुल सांकृत्यायन

राहुल सांकृत्यायन हिन्दी के एक अद्वितीय यात्रा-लेखक, इतिहासकार, बौद्ध दार्शनिक और भाषाविद् थे।

जीवनवृत्त

  • जन्म: 9 अप्रैल 1893, पंदहा (आजमगढ़, उत्तर प्रदेश)
  • मूल नाम: केदारनाथ पांडे
  • उपाधि: 'महापंडित'
  • मृत्यु: 14 अप्रैल 1963

बहुभाषाविद्

राहुल जी 30 से अधिक भाषाओं के जानकार थे — हिन्दी, संस्कृत, पाली, तिब्बती, चीनी, जापानी, अंग्रेज़ी, फ्रांसीसी, रूसी आदि।

घुमक्कड़ी

वे लगभग पूरे भारत और एशिया का भ्रमण कर चुके थे। तिब्बत 4 बार गए। श्रीलंका, जापान, चीन, सोवियत संघ, ईरान, अफगानिस्तान आदि की यात्राएँ कीं।

प्रमुख रचनाएँ

  • यात्रा-वृत्तांत: तिब्बत में सवा बरस, मेरी लद्दाख यात्रा, घुमक्कड़ शास्त्र
  • उपन्यास: सिंह सेनापति, जय यौधेय
  • इतिहास: मध्य एशिया का इतिहास, ऋग्वैदिक आर्य
  • दर्शन: दर्शन-दिग्दर्शन, बौद्ध दर्शन

3. पाठ का सारांश

प्रारंभ — फरी कलिङ्पोङ्ग

लेखक तिब्बत की यात्रा पर निकलते हैं। फरी कलिङ्पोङ्ग नामक स्थान से होकर गुज़रते हैं। मार्ग में चाय-नमक की चाय पीते हैं — तिब्बती परंपरा।

बौद्ध मठ का अनुभव

मार्ग में एक मठ में रुकते हैं। मठ के पुजारी ('लाम') ने आतिथ्य किया। बौद्ध मठों की समृद्ध परंपरा का वर्णन।

डाँडा थोङ्ला की कठिनाई

सबसे कठिन भाग — डाँडा थोङ्ला नामक हिमालयी दर्रा। ऊँचाई पर सांस लेने में कठिनाई, ठंड, थकान। डकैतों का भी डर। पर लेखक के साथी पुंगु ने मार्ग दिखाया।

यजमान-यजमानी

तिब्बती संस्कृति में 'यजमान-यजमानी' प्रथा — मेज़बान और अतिथि का संबंध। एक यजमानी ने लेखक का सत्कार किया।

तिङ्ङी पर्वत और थोङ्ला

तिङ्ङी से शाक्य का दिखाई देना। हिमालय की भव्यता।

अंत — ल्हासा की ओर

अंत में ल्हासा के निकट पहुँचना। तिब्बती संस्कृति के अंशों से परिचय।


4. प्रमुख तत्व और घटनाएँ

तिब्बती संस्कृति

  • यजमान-यजमानी: मेज़बान-अतिथि का अनूठा संबंध।
  • बौद्ध मठ: तिब्बत में हजारों मठ।
  • लाम: बौद्ध भिक्षु।
  • छङ्ग: तिब्बती जौ की शराब।
  • मक्खन की चाय: तिब्बती परंपरागत पेय।

भौगोलिक तत्व

  • डाँडा थोङ्ला: हिमालय का दर्रा।
  • तिङ्ङी: तिब्बत का स्थान।
  • शाक्य: बौद्ध तीर्थ।
  • ल्हासा: तिब्बत की राजधानी।

सामाजिक तत्व

  • तिब्बत में जाति-व्यवस्था का अभाव।
  • स्त्रियाँ बेधड़क खुलकर रहती हैं।
  • भिखमंगों का अनादर नहीं।

5. लेखन शैली

विशेषताएँ

  1. वर्णनात्मक: स्थानों, घटनाओं का विस्तृत वर्णन।
  2. सरल भाषा: तत्सम-तद्भव-विदेशी (तिब्बती) शब्दों का सुंदर मिश्रण।
  3. यथार्थवादी: वास्तविक अनुभव।
  4. रोमांचक: साहसिक यात्रा का वर्णन।
  5. सांस्कृतिक तुलना: भारतीय और तिब्बती संस्कृति की तुलना।

तिब्बती शब्दावली

राहुल जी ने तिब्बती शब्दों का प्रयोग करके अनुवादात्मक समझाव दिया है — जैसे 'थोङ्ला', 'लाम', 'छङ्ग', 'यजमान-यजमानी', 'पुंगु'।


6. पाठ का संदेश

  1. साहस और संकल्प: कठिन यात्रा भी संकल्प से पूरी होती है।
  2. सांस्कृतिक समझ: अन्य संस्कृतियों को सम्मान देना चाहिए।
  3. प्रकृति-प्रेम: हिमालय की भव्यता का अनुभव।
  4. विश्व-नागरिकता: 'अतिथि देवो भव' का तिब्बती रूप।
  5. जिज्ञासा: नई जगहें देखने की प्रवृत्ति।

7. आज की प्रासंगिकता

  • तिब्बत आज चीन के अधीन है — स्वतंत्र नहीं रहा।
  • राहुल जी का चित्रण ऐतिहासिक दस्तावेज़ बन गया है।
  • बौद्ध संस्कृति की रक्षा का संदेश।
  • हिमालय-संरक्षण के प्रति जागरूकता।
  • यात्रा-साहित्य के लिए आदर्श।

8. महत्वपूर्ण तथ्य

  • पाठ का स्रोत: 'तिब्बत में सवा बरस'
  • यात्रा वर्ष: 1929-30
  • प्रमुख स्थान: कलिङ्पोङ्ग, डाँडा थोङ्ला, तिङ्ङी, शाक्य, ल्हासा
  • साथी: सुमति (बौद्ध भिक्षु जो साथ चले)
  • राहुल का तिब्बती नाम: रहीम राहुल

9. समापन

राहुल सांकृत्यायन की 'ल्हासा की ओर' केवल एक यात्रा-वृत्तांत नहीं है — यह साहस, संस्कृति-प्रेम, और अंतर्राष्ट्रीय भाईचारे का दस्तावेज़ है। यह पाठ हमें सिखाता है कि साहस से जीवन की किसी भी कठिनाई को पार किया जा सकता है।

Key formulas & results

Everything you need to memorise, in one card. Screenshot this for revision.

लेखक
राहुल सांकृत्यायन (मूल नाम केदारनाथ पांडे, 1893-1963)
'महापंडित' उपाधि
विधा
यात्रा-वृत्तांत — 'तिब्बत में सवा बरस' का अंश
1929-30 की यात्रा
मुख्य स्थान
कलिङ्पोङ्ग → डाँडा थोङ्ला → तिङ्ङी → शाक्य → ल्हासा
यात्रा का मार्ग
तिब्बती संस्कृति
यजमान-यजमानी प्रथा + बौद्ध मठ + लाम + छङ्ग + मक्खन-चाय
विशिष्ट तत्व
यात्रा का साथी
सुमति (बौद्ध भिक्षु)
मार्गदर्शक
राहुल की बहुभाषाविदता
30+ भाषाएँ — हिन्दी, संस्कृत, पाली, तिब्बती, चीनी, अंग्रेज़ी आदि
विद्वत्ता
⚠️

Common mistakes & fixes

These are the exact errors that cost students marks in board exams. Read them once, save yourself the trouble.

WATCH OUT
राहुल का मूल नाम भूलना
मूल नाम: केदारनाथ पांडे। बाद में राहुल सांकृत्यायन। बौद्ध-दर्शन के प्रति झुकाव के कारण नाम बदला।
WATCH OUT
यात्रा वर्ष गलत लिखना
1929-30 — सरकारी अनुमति के बिना तिब्बत में प्रवेश। उस समय तिब्बत स्वतंत्र था।
WATCH OUT
'यजमान-यजमानी' को समझना मुश्किल
तिब्बती संस्कृति में मेज़बान (यजमान) और अतिथि (यजमानी) का अनूठा संबंध। दोनों एक-दूसरे के लिए महत्वपूर्ण।
WATCH OUT
स्थानों के नाम गलत बोलना
डाँडा थोङ्ला (दर्रा), तिङ्ङी, शाक्य (बौद्ध तीर्थ), ल्हासा (तिब्बत की राजधानी) — सही उच्चारण और स्पेलिंग याद रखें।

Practice problems

Try each one yourself before tapping "Show solution". Active recall > rereading.

Q1EASY· पहचान
ल्हासा कहाँ की राजधानी है?
Show solution
चरण 1 — पहचान। ल्हासा तिब्बत की राजधानी है। चरण 2 — विवरण। तिब्बत आज चीन के अधीन है (1950 से)। ल्हासा बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र, दलाई लामा का परंपरागत निवास। ✦ उत्तर: ल्हासा तिब्बत की राजधानी है।
Q2EASY· लेखक
राहुल सांकृत्यायन का मूल नाम क्या था?
Show solution
चरण 1 — मूल नाम। केदारनाथ पांडे। चरण 2 — नाम परिवर्तन। बौद्ध दर्शन के प्रति झुकाव और घुमक्कड़ी की प्रवृत्ति के कारण नाम बदलकर 'राहुल सांकृत्यायन' रखा। 'राहुल' = भगवान बुद्ध का पुत्र। चरण 3 — उपाधि। 'महापंडित' की उपाधि से सम्मानित। ✦ उत्तर: राहुल सांकृत्यायन का मूल नाम केदारनाथ पांडे था। बौद्ध-दर्शन के प्रभाव से नाम बदला।
Q3MEDIUM· घटना
तिब्बती संस्कृति की दो प्रमुख विशेषताएँ बताइए जो लेखक ने अनुभव की थीं।
Show solution
चरण 1 — विशेषता 1: 'यजमान-यजमानी' प्रथा। तिब्बत में मेज़बान और अतिथि के बीच अनूठा संबंध होता है। यजमान (मेज़बान) यजमानी (अतिथि) का सत्कार करता है, और यह संबंध पीढ़ियों तक चलता है। लेखक का अनुभव: एक यजमानी (तिब्बती स्त्री) ने उनका भोजन-व्यवस्था की। चरण 2 — विशेषता 2: बौद्ध मठ-संस्कृति। तिब्बत में हज़ारों बौद्ध मठ हैं। 'लाम' (बौद्ध भिक्षु) समाज में सम्मानित होते हैं। मठ ज्ञान, अध्यात्म, संस्कृति के केंद्र। लेखक का अनुभव: मार्ग में मठों में रुके, लाम-गुरुओं से मिले। चरण 3 — अन्य विशेषताएँ। • मक्खन-चाय (नमकीन चाय): तिब्बती परंपरागत पेय। • छङ्ग: जौ की हल्की शराब। • जाति-व्यवस्था का अभाव। • स्त्रियों का खुलापन। ✦ उत्तर: (i) यजमान-यजमानी प्रथा — तिब्बत में मेज़बान-अतिथि का अनूठा पीढ़ीगत संबंध। (ii) बौद्ध मठ-संस्कृति — मठ ज्ञान और अध्यात्म के केंद्र, लाम सम्मानित।
Q4MEDIUM· घटना
डाँडा थोङ्ला की यात्रा में लेखक को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?
Show solution
चरण 1 — भौगोलिक कठिनाइयाँ। • अत्यधिक ऊँचाई पर पठार। • हिमालय की पहाड़ी से चढ़कर पार करना। • ठंड और बर्फ़। • ऊँचाई पर ऑक्सीजन की कमी से सांस लेने में कठिनाई। • थकान। चरण 2 — सामाजिक कठिनाइयाँ। • डकैतों का डर — यह क्षेत्र असुरक्षित था। • मार्ग में रहने की समस्या। • भोजन-व्यवस्था की कठिनाई। चरण 3 — साथी की भूमिका। • पुंगु (साथी) ने मार्ग दिखाया। • स्थानीय यजमान-यजमानियों ने सहायता की। • मठों में आश्रय मिला। चरण 4 — मानसिक चुनौती। • दुर्गम मार्ग में हिम्मत बनाए रखना। • अनजान भाषा-संस्कृति में जीना। • घर से दूर रहने का संताप। ✦ उत्तर: डाँडा थोङ्ला की यात्रा में लेखक को अनेक कठिनाइयाँ पेश आईं: (i) भौगोलिक — ऊँचाई, ठंड, बर्फ़, ऑक्सीजन की कमी, थकान; (ii) सामाजिक — डकैतों का डर, भोजन-आश्रय की समस्या; (iii) मानसिक — अनजान संस्कृति में रहना। साथी पुंगु, स्थानीय यजमानियों और मठों के लामों ने सहायता की।

5-minute revision

The whole chapter, distilled. Read this the night before the exam.

  • लेखक: राहुल सांकृत्यायन (मूल नाम केदारनाथ पांडे, 'महापंडित' उपाधि, 1893-1963)
  • विधा: यात्रा-वृत्तांत — 'तिब्बत में सवा बरस' का अंश
  • यात्रा वर्ष: 1929-30, जब तिब्बत स्वतंत्र था
  • मार्ग: कलिङ्पोङ्ग → डाँडा थोङ्ला (हिमालय दर्रा) → तिङ्ङी → शाक्य → ल्हासा
  • साथी: सुमति (बौद्ध भिक्षु), पुंगु
  • तिब्बती संस्कृति: यजमान-यजमानी प्रथा, बौद्ध मठ, लाम, छङ्ग (जौ की शराब), मक्खन-चाय
  • कठिनाइयाँ: ऊँचाई, ठंड, ऑक्सीजन कमी, डकैत, अनजान भाषा-संस्कृति
  • मूल्य: साहस, संस्कृति-समझ, प्रकृति-प्रेम, अंतर्राष्ट्रीय भाईचारा
  • राहुल जी 30+ भाषाओं के जानकार थे
  • ल्हासा बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र, दलाई लामा का परंपरागत निवास

CBSE marks blueprint

Where the marks come from in this chapter — so you can plan your prep.

Typical chapter weightage: 5–6 अंक प्रति बोर्ड पेपर

Question typeMarks eachTypical countWhat it tests
बहुविकल्पीय / अति लघु11–2लेखक नाम; ल्हासा कहाँ; डाँडा थोङ्ला; तिब्बती शब्द
लघु उत्तरीय31यजमान-यजमानी प्रथा; डाँडा थोङ्ला की कठिनाई; तिब्बती संस्कृति
दीर्घ उत्तरीय50–1सम्पूर्ण यात्रा-वर्णन; तिब्बती संस्कृति; साहसिक यात्रा का अनुभव
Prep strategy
  • राहुल सांकृत्यायन का परिचय — मूल नाम केदारनाथ पांडे, 'महापंडित' उपाधि, 30+ भाषाएँ
  • यात्रा का मार्ग याद रखें: कलिङ्पोङ्ग → डाँडा थोङ्ला → तिङ्ङी → शाक्य → ल्हासा
  • तिब्बती संस्कृति के तत्व: यजमान-यजमानी, बौद्ध मठ, लाम, छङ्ग, मक्खन-चाय
  • 1929-30 की यात्रा — उस समय तिब्बत स्वतंत्र था
  • यात्रा की कठिनाइयाँ (भौगोलिक, सामाजिक, मानसिक) के 3-4 बिंदु तैयार करें
  • तिब्बती शब्दों (थोङ्ला, लाम, छङ्ग) की वर्तनी सही याद रखें

Where this shows up in the real world

This chapter isn't just an exam topic — it lives in the world around you.

तिब्बत-संस्कृति अध्ययन

राहुल का यह यात्रा-वृत्तांत तिब्बत के स्वतंत्र काल का अनमोल दस्तावेज़ है।

यात्रा-साहित्य

हिन्दी यात्रा-साहित्य के लिए आदर्श — 'घुमक्कड़ शास्त्र' के साथ-साथ।

बौद्ध-धर्म अध्ययन

तिब्बती बौद्ध-धर्म, मठ-संस्कृति, लाम-परंपरा की जानकारी।

हिमालय-संरक्षण

हिमालय की भव्यता और संरक्षण की चिंता पर पाठ।

अंतर्राष्ट्रीय समझ

विभिन्न संस्कृतियों के बीच मित्रता और सम्मान का संदेश।

साहस-शिक्षा

बच्चों को साहसिक यात्राओं और जिज्ञासा का महत्व सिखाता है।

Exam strategy

Battle-tested tips from teachers and toppers for this chapter.

  1. राहुल सांकृत्यायन का परिचय (मूल नाम, उपाधि, यात्राएँ) 1-2 अंक के लिए
  2. यात्रा का मार्ग क्रमबद्ध रूप से याद रखें
  3. तिब्बती संस्कृति के 3-4 तत्वों को विस्तार से समझें
  4. डाँडा थोङ्ला की कठिनाइयों के 4-5 बिंदु तैयार करें
  5. तिब्बती शब्दों की वर्तनी सही याद रखें
  6. 1929-30 की यात्रा — उस समय तिब्बत स्वतंत्र था (आज नहीं)
  7. मूल्य-आधारित प्रश्नों के लिए: साहस, संस्कृति-सम्मान, प्रकृति-प्रेम पर ज़ोर

Going beyond the textbook

For olympiad aspirants and curious learners — topics that build on this chapter.

  • राहुल सांकृत्यायन की अन्य यात्रा-पुस्तकें: 'मेरी लद्दाख यात्रा', 'घुमक्कड़ शास्त्र'
  • तिब्बती बौद्ध-धर्म के अन्य अध्येता: हीरालाल लाख
  • तिब्बत-समस्या: 1950 से अब तक का इतिहास, दलाई लामा का निर्वासन
  • हिन्दी यात्रा-साहित्य की परंपरा: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय', मोहन राकेश

Where else this chapter is tested

CBSE board isn't the only one — other exams test this chapter too.

CBSE Board Class 9उच्च — मुख्य पाठ्यक्रम
हिन्दी ओलिंपियाडमध्यम
NTSE / NMMSमध्यम — साहित्य अनुभाग
UGC NET हिन्दीउच्च — यात्रा-साहित्य अध्ययन

Questions students ask

The real ones — pulled from the Q&A community and tutor sessions.

बौद्ध दर्शन के अध्ययन के लिए। तिब्बत में हज़ारों बौद्ध मठ हैं जहाँ संस्कृत-पाली से अनुदित बौद्ध ग्रंथ संरक्षित हैं। राहुल जी 4 बार तिब्बत गए।

1950 में चीन ने तिब्बत पर अधिकार कर लिया। दलाई लामा 1959 में भारत आ गए। अब तिब्बत चीन का स्वायत्त क्षेत्र है। राहुल जी की यात्रा 1929-30 की है, जब तिब्बत स्वतंत्र था।

तिब्बत की एक अनूठी प्रथा जिसमें मेज़बान (यजमान) और अतिथि (यजमानी) के बीच पीढ़ियों तक चलने वाला संबंध बनता है। दोनों एक-दूसरे के लिए महत्वपूर्ण होते हैं — जैसे एक रिश्तेदारी।

तिब्बत की परंपरागत चाय। चाय की पत्तियों, याक के मक्खन और नमक से बनाई जाती है। ऊँचाई और ठंडे क्षेत्र में ऊर्जा और गर्मी देती है।
Verified by the tuition.in editorial team
Last reviewed on 18 May 2026. Written and reviewed by subject-matter experts — read about our process.
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