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  • 1विद्यासागर नौटियाल और टिहरी-साहित्य
  • 2टिहरी बाँध परियोजना और विस्थापन की समस्या
  • 3विकास के मानवीय और पर्यावरणीय पक्ष
  • 4गरीबी और पुनर्वास का संकट
  • 5सामाजिक-यथार्थवादी कहानी की विशेषताएँ
💡
Why this chapter matters
विद्यासागर नौटियाल की यह कहानी टिहरी बाँध-विस्थापन की मानवीय कीमत को एक गरीब, अनाम बुज़ुर्ग स्त्री के माध्यम से उजागर करती है। विकास बनाम विस्थापन का गंभीर प्रश्न।

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माटी वाली — कक्षा 9 हिन्दी (कृतिका)

"माटी वाली की रोटी — उसकी सबसे बड़ी पूँजी थी। आज वह भी छिन गई।" — विद्यासागर नौटियाल

1. पाठ-परिचय

'माटी वाली' विद्यासागर नौटियाल द्वारा रचित एक मार्मिक कहानी है। यह कहानी टिहरी बाँध परियोजना के कारण विस्थापित हुई पुरानी टिहरी के लोगों की पीड़ा को व्यक्त करती है। मुख्य पात्र 'माटी वाली' — एक बुज़ुर्ग, गरीब स्त्री — जो मिट्टी (माटी) बेचकर जीवन-यापन करती थी।

मुख्य भाव

  • विकास बनाम विस्थापन
  • पर्यावरण और मानवीय कीमत
  • गरीबों की दुर्दशा
  • पुरानी संस्कृति का लोप
  • पारिवारिक संबंध

टिहरी बाँध — पृष्ठभूमि

  • भारत का सबसे ऊँचा बाँध (260.5 मीटर)
  • एशिया का दूसरा सबसे ऊँचा
  • भागीरथी नदी पर (उत्तराखंड)
  • निर्माण: 1978-2006
  • विस्थापित: 1 लाख+ लोग
  • पुरानी टिहरी पूरी तरह डूब गई

2. लेखक-परिचय — विद्यासागर नौटियाल

जीवनवृत्त

  • जन्म: 29 सितंबर 1933, टिहरी (उत्तराखंड)
  • मृत्यु: 12 फरवरी 2012
  • उपाधि: 'टिहरी का लेखक'
  • पेशा: कथाकार, उपन्यासकार, राजनीतिज्ञ

राजनैतिक जीवन

  • CPI (M) से जुड़े
  • टिहरी के स्थानीय राजनैतिक नेता
  • गरीबों, किसानों के हक के लिए संघर्ष
  • टिहरी बाँध-विस्थापन के विरुद्ध आंदोलन

प्रमुख रचनाएँ

उपन्यास:

  • भीम अकेला (1990)
  • सूरज सबका है (1996)
  • टिहरी 1948 (2001) — टिहरी रियासत के अंतिम दिन
  • यमुना के बाग़ी बेटे (2008)

कहानी-संग्रह:

  • भैंस का कट्या (1956)
  • माटी वाली (इसी से यह पाठ)
  • फट जा पंचधार
  • तेरह सौ सालं
  • सुख-दुख का साथ
  • रिंगाल का परिवार

सम्मान:

  • साहित्य अकादमी पुरस्कार (2008) — 'यमुना के बाग़ी बेटे'

भाषा-शैली

  • सरल खड़ी बोली
  • टिहरी-गढ़वाली रंग
  • भावप्रवण, मार्मिक
  • सामाजिक चेतना से युक्त

3. पाठ का सारांश

प्रारंभ — माटी वाली का परिचय

दृश्य: पुरानी टिहरी का बाज़ार। 60-65 वर्ष की एक बुज़ुर्ग स्त्री — 'माटी वाली' — सिर पर माटी (पीली मिट्टी) का गट्ठर लेकर बेचने आती है।

माटी वाली:

  • नाम तक नहीं — सब 'माटी वाली' कहते हैं
  • पुरानी टिहरी में अकेली रहती है
  • पति बूढ़ा और बीमार
  • कोई बच्चा नहीं — एकमात्र सहारा एक-दूसरे
  • रोज़ माटी बेचकर रोटी कमाती है

मिट्टी का धंधा:

  • गढ़वाल की पीली, चिकनी मिट्टी
  • घरों के फर्श, दीवारों की लीपाई के लिए
  • विशेष रूप से त्योहारों पर
  • खुद खोदती, गधे पर लादती (पहले), बाद में सिर पर लाद कर लाती

उसके ग्राहक — अमीर परिवार

ठकुराइन का घर:

  • एक धनी परिवार
  • ठकुराइन — दयालु महिला
  • माटी वाली को रोटी देती है — दया से
  • माटी वाली की भूख कभी नहीं मिटती — हमेशा कम मिलता है

बातचीत:

  • ठकुराइन पूछती है — 'कैसी हो?'
  • माटी वाली — 'जैसा भगवान रखे'
  • पति की बीमारी, अकेलापन की चर्चा

माटी वाली का जीवन

दिनचर्या:

  • सुबह 4 बजे उठती
  • मिट्टी खोदना
  • 10 किलो+ मिट्टी सिर पर लादना
  • बाज़ार में बेचना
  • शाम को थोड़ा अनाज
  • रात में पति की देखभाल

आय:

  • 5-10 रुपये दिन के
  • गरीबी की चरम सीमा
  • भोजन भी मुश्किल

टिहरी बाँध की बात

अफवाह:

  • नया बाँध बनेगा
  • पुरानी टिहरी डूब जाएगी
  • सब को निकलना होगा

माटी वाली की चिंता:

  • 'कहाँ जाएँगे?'
  • 'पति बीमार है'
  • 'मिट्टी का धंधा कैसे चलेगा?'
  • 'कोई जान-पहचान नहीं नई जगह में'

पति की मृत्यु

अंत में:

  • एक रात माटी वाली का पति मर जाता है।
  • कोई नहीं — न संतान, न रिश्तेदार।
  • अकेली बुढ़िया।
  • कुछ पड़ोसी सहायता करते हैं — पर सीमित।

विस्थापन का दिन

सरकारी हुक्म:

  • 'गाँव खाली करो — पानी आ रहा है।'
  • नए पुनर्वास-स्थल पर जगह दी जाएगी
  • पर कोई गारंटी नहीं

माटी वाली का प्रस्थान:

  • सिर पर थोड़ा सामान
  • आँखों में आँसू
  • 'मेरी मिट्टी कहाँ रहेगी?'
  • अपना घर, गाँव, मिट्टी सब छोड़कर
  • 'कहाँ जाएँगे?'

कहानी का समापन

  • माटी वाली पुनर्वास-स्थल पर अकेली, दुखी
  • नई जगह में मिट्टी का धंधा नहीं
  • पहचान खो गई
  • एक दिन वह भी बीमारी से मर जाती है
  • अकेली, अनाम
  • 'माटी वाली' पुरानी टिहरी की मिट्टी में मिल जाती है

4. केन्द्रीय भाव और संदेश

मुख्य मुद्दे

  1. विकास बनाम विस्थापन: बड़े बाँध से लाभ कुछ को, हानि गरीबों को।
  2. गरीबों की दुर्दशा: माटी वाली जैसे लोगों का कोई नहीं।
  3. पर्यावरण की कीमत: नदी, पहाड़, गाँव सब समाप्त।
  4. पारिवारिक प्रेम: माटी वाली और पति का अंतिम सहारा।
  5. पहचान का संकट: नई जगह में पुरानी पहचान खो गई।
  6. सरकारी विफलता: पुनर्वास अधूरा, गरीबों को कोई गारंटी नहीं।

प्रतीक — 'माटी'

  • मिट्टी = जीवन का आधार
  • माटी वाली के लिए धंधा, पहचान, रिश्ता
  • गाँव की मिट्टी = संस्कृति
  • डूबती मिट्टी = खोती संस्कृति

5. साहित्यिक विशेषताएँ

भाषा

  • सरल खड़ी बोली
  • टिहरी-गढ़वाली शब्द (कुछ)
  • भावप्रवण, मार्मिक

शैली

  • विवरणात्मक
  • संवादात्मक
  • यथार्थवादी
  • भावनात्मक

अलंकार

  • प्रतीक: 'माटी वाली' = सब गरीब विस्थापित
  • विरोधाभास: ठकुराइन की दया बनाम माटी वाली की भूख
  • रूपक: मिट्टी = जीवन

रस

  • करुण रस — पूरी कहानी
  • शांत रस — अंतिम भाव

विधा

  • कथा-कहानी: यथार्थवादी
  • सामाजिक प्रतिबद्धता: स्पष्ट

6. टिहरी बाँध — विस्तृत संदर्भ

तकनीकी जानकारी

  • ऊँचाई: 260.5 मीटर (भारत का सबसे ऊँचा)
  • विद्युत-उत्पादन: 1,000 MW + 1000 MW pumped storage
  • जलाशय क्षमता: 4 बिलियन घन मीटर
  • लंबाई: 575 मीटर
  • निर्माण-काल: 1978-2006

इतिहास

  • 1949: तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने प्रस्ताव
  • 1978: निर्माण शुरू
  • 1980-90 के दशक: सुंदरलाल बहुगुणा का विरोध
  • 2002: जल भरना शुरू
  • 2006: पूरा हो गया
  • 2007: विद्युत-उत्पादन शुरू

विरोध-आंदोलन

सुंदरलाल बहुगुणा:

  • पर्यावरणवादी
  • 'चिपको आंदोलन' के नायक
  • टिहरी-विरोधी आंदोलन के नेता
  • 'टिहरी डूबेगी, हम भी डूबेंगे'

मुख्य चिंताएँ:

  • भू-कंप-क्षेत्र (Seismic Zone IV)
  • 1 लाख+ लोगों का विस्थापन
  • पर्यावरण-नाश
  • गंगा-संस्कृति का लोप

विस्थापन

  • प्रभावित: 1,00,000+ लोग
  • डूबे गाँव: पुरानी टिहरी समेत 100+ गाँव
  • पुनर्वास-स्थल: नई टिहरी, ऋषिकेश, देहरादून
  • समस्याएँ: अधूरा मुआवज़ा, अपर्याप्त सुविधाएँ, सांस्कृतिक संकट

7. विकास-विरोधाभास

बाँध के लाभ

  • विद्युत-उत्पादन
  • सिंचाई
  • बाढ़-नियंत्रण
  • पीने का पानी (दिल्ली)

बाँध की कीमत

  • मानवीय: 1 लाख+ विस्थापित
  • पर्यावरण: नदी-संस्कृति का नाश
  • सांस्कृतिक: 1000+ साल पुरानी टिहरी डूबी
  • आर्थिक: ₹10,000 करोड़+ खर्च

प्रश्न

  • क्या यह विकास उचित था?
  • क्या गरीबों की कीमत पर अमीरों का विकास?
  • क्या वैकल्पिक मार्ग नहीं थे?

8. केन्द्रीय संदेश

  1. विकास का दूसरा पहलू: हर विकास के पीछे किसी की कीमत।
  2. गरीबों की आवाज़: जो सबसे कमज़ोर हैं, उनकी कोई नहीं सुनता।
  3. पर्यावरण-संरक्षण: नदी, पहाड़, गाँव अनमोल।
  4. पुनर्वास का महत्व: विस्थापितों के साथ न्याय हो।
  5. मानवीय गरिमा: हर मनुष्य की पहचान, अधिकार।

9. आज की प्रासंगिकता

विस्थापन की समस्याएँ आज भी

  • सरदार सरोवर बाँध (नर्मदा) — 4 लाख विस्थापित
  • पोलावरम बाँध (आंध्र) — 2 लाख प्रभावित
  • केन-बेतवा लिंक परियोजना — हाल का प्रस्ताव

कानूनी ढाँचा

  • भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013: फिर के अधिकार, उचित मुआवज़ा
  • Forest Rights Act 2006: आदिवासी अधिकार
  • National Rehabilitation Policy 2007

समाधान

  • विकल्प तलाशें (छोटे बाँध, सौर-ऊर्जा)
  • पारिस्थितिक संतुलन
  • विस्थापितों का उचित पुनर्वास
  • स्थानीय समुदायों की भागीदारी

10. प्रमुख उद्धरण

"माटी वाली की रोटी — उसकी सबसे बड़ी पूँजी थी।"

"कहाँ जाएँगे? मेरी मिट्टी कहाँ रहेगी?"

"टिहरी डूबेगी, हम भी डूबेंगे।" (सुंदरलाल बहुगुणा का नारा)


11. समापन

'माटी वाली' केवल एक कहानी नहीं — विकास-यज्ञ की एक भयानक त्रासदी है। विद्यासागर नौटियाल ने एक गरीब, अनाम बुज़ुर्ग स्त्री के माध्यम से टिहरी बाँध-विस्थापन की मानवीय कीमत हमें दिखाई है। यह पाठ हमें झकझोरता है — क्या हमारा विकास इतना निर्मम होना चाहिए? क्या गरीबों की कीमत पर ही प्रगति संभव है? कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए यह कहानी — सामाजिक चेतना, पर्यावरण-बोध, और मानवीय संवेदना का अद्भुत स्रोत।

Key formulas & results

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लेखक
विद्यासागर नौटियाल (1933-2012) — 'टिहरी का लेखक'
उत्तराखंड (टिहरी) से
साहित्य अकादमी
2008 — 'यमुना के बाग़ी बेटे' (उपन्यास)
राजनीति
CPI (M) से जुड़े
विस्थापन-विरोधी आंदोलन
मूल संग्रह
'माटी वाली' (कहानी-संग्रह)
मुख्य पात्र
माटी वाली (60-65 वर्ष, बुज़ुर्ग); ठकुराइन (दयालु ग्राहक); पति (बीमार, बूढ़ा)
टिहरी बाँध
260.5 मी ऊँचा, भारत का सबसे ऊँचा; भागीरथी पर; 1978-2006
1 लाख+ विस्थापित
विरोध-नेता
सुंदरलाल बहुगुणा — पर्यावरणवादी, चिपको-आंदोलन के नायक
'टिहरी डूबेगी, हम भी डूबेंगे'
केन्द्रीय मुद्दा
विकास बनाम विस्थापन; गरीबों की कीमत
⚠️

Common mistakes & fixes

These are the exact errors that cost students marks in board exams. Read them once, save yourself the trouble.

WATCH OUT
लेखक का राज्य गलत बताना
विद्यासागर नौटियाल = उत्तराखंड (टिहरी)। 'टिहरी का लेखक' कहलाते हैं। कई कहानियाँ टिहरी-केन्द्रित।
WATCH OUT
टिहरी बाँध की मूल नदी गलत
भागीरथी नदी — टिहरी बाँध भागीरथी पर है (जो आगे गंगा बनती है)। उत्तराखंड में।
WATCH OUT
बाँध का निर्माण-वर्ष
1978-2006 (शुरू-समाप्त)। जलाशय 2002 से भरना शुरू। 2007 से विद्युत-उत्पादन।
WATCH OUT
माटी वाली का धंधा भूलना
वह पीली, चिकनी मिट्टी (माटी) बेचती थी — जो घरों की लीपाई के लिए प्रयोग होती। इसी से रोज़ी।

Practice problems

Try each one yourself before tapping "Show solution". Active recall > rereading.

Q1EASY· लेखक
विद्यासागर नौटियाल का संबंध किस राज्य से है?
Show solution
✦ उत्तर: उत्तराखंड (टिहरी)। उन्हें 'टिहरी का लेखक' कहा जाता है। साहित्य अकादमी 2008 — 'यमुना के बाग़ी बेटे'।
Q2EASY· बाँध
टिहरी बाँध किस नदी पर बना है?
Show solution
✦ उत्तर: भागीरथी नदी (उत्तराखंड) — जो आगे गंगा बनती है। बाँध 260.5 मीटर ऊँचा — भारत का सबसे ऊँचा बाँध।
Q3MEDIUM· जीवन
माटी वाली के दैनिक जीवन का वर्णन कीजिए।
Show solution
चरण 1 — परिचय। 60-65 वर्ष की बुज़ुर्ग स्त्री। नाम तक नहीं — सब उसे 'माटी वाली' कहते हैं। पुरानी टिहरी में रहती है। चरण 2 — परिवार। पति बूढ़ा और बीमार। कोई बच्चा नहीं। एकमात्र सहारा एक-दूसरे। चरण 3 — धंधा। गढ़वाल की पीली, चिकनी मिट्टी खोदती। 10 किलो+ सिर पर लादकर बाज़ार में बेचती। घरों की लीपाई के लिए लोग खरीदते। चरण 4 — दिनचर्या। सुबह 4 बजे उठती। मिट्टी खोदना, ढोना, बेचना। शाम को पति की देखभाल। दिन की आय 5-10 रुपये। चरण 5 — गरीबी। भोजन भी मुश्किल। ठकुराइन जैसे दयालु ग्राहक रोटी देते। पर भूख कभी नहीं मिटती। ✦ उत्तर: माटी वाली एक गरीब, अनाम, 60-65 वर्षीय बुज़ुर्ग स्त्री है। पुरानी टिहरी में बीमार पति के साथ रहती है। रोज़ पीली मिट्टी खोदकर, 10 किलो+ सिर पर लादकर बाज़ार में बेचती है। दिन की आय 5-10 रुपये। ठकुराइन जैसे दयालु ग्राहक रोटी देते। भारतीय गरीबी का जीवंत चित्र।
Q4MEDIUM· विस्थापन
टिहरी बाँध और विस्थापन की समस्या को कहानी में कैसे दर्शाया गया है?
Show solution
चरण 1 — टिहरी बाँध। भागीरथी पर 260.5 मी ऊँचा बाँध (1978-2006)। 1 लाख+ लोग विस्थापित। पुरानी टिहरी पूरी तरह डूब गई। चरण 2 — अफवाह से चिंता। कहानी में अफवाह फैलती है — 'नया बाँध बनेगा, पुरानी टिहरी डूबेगी'। माटी वाली चिंतित — 'कहाँ जाएँगे?' चरण 3 — माटी वाली का दर्द। • पति बीमार, कैसे हटें? • मिट्टी का धंधा नई जगह कैसे चलेगा? • कोई जान-पहचान नहीं • 'मेरी मिट्टी कहाँ रहेगी?' चरण 4 — विस्थापन का दिन। सरकारी हुक्म 'गाँव खाली करो'। माटी वाली थोड़ा सामान लेकर निकलती है — आँखों में आँसू। चरण 5 — पुनर्वास का संकट। नई जगह में मिट्टी का धंधा नहीं। पहचान खो गई। अंत में बीमारी से मर जाती है — अकेली, अनाम। ✦ उत्तर: कहानी टिहरी बाँध-विस्थापन की मानवीय कीमत को माटी वाली के माध्यम से दिखाती है। 260.5 मी ऊँचा बाँध 1 लाख+ लोगों को विस्थापित। माटी वाली के लिए — पति बीमार, मिट्टी का धंधा, कोई जान-पहचान नहीं — सब समस्याएँ। 'मेरी मिट्टी कहाँ रहेगी?' — एक मार्मिक प्रश्न। अंत में पुनर्वास-स्थल पर अकेली मर जाती है। विकास के नाम पर गरीबों की त्रासदी।
Q5HARD· विकास-विरोधाभास
'माटी वाली' कहानी के माध्यम से लेखक विकास और विस्थापन के विरोधाभास को कैसे उजागर करता है?
Show solution
चरण 1 — कहानी का परिचय। विद्यासागर नौटियाल की यह कहानी टिहरी बाँध-विस्थापन की पृष्ठभूमि पर। मुख्य पात्र माटी वाली — एक गरीब बुज़ुर्ग। चरण 2 — विकास के दावे। टिहरी बाँध से लाभ: • 1000 MW विद्युत • सिंचाई • दिल्ली को पीने का पानी • बाढ़-नियंत्रण चरण 3 — विकास की कीमत। • 1 लाख+ लोग विस्थापित • 100+ गाँव डूबे • पुरानी टिहरी 1000+ साल की सांस्कृतिक धरोहर समाप्त • नदी-पर्यावरण का नाश चरण 4 — माटी वाली का प्रतीक। माटी वाली = सब गरीब विस्थापितों का प्रतीक। उसकी कहानी = हर विस्थापित की कहानी। 'विकास' का चेहरा। चरण 5 — विरोधाभास। • अमीर शहर (दिल्ली) को पानी, बिजली; गरीब गाँव (टिहरी) को विस्थापन • योजना: तकनीकी रूप से सफल; मानवीय रूप से असफल • बड़ी संख्या के लिए लाभ, छोटी संख्या को त्रासदी चरण 6 — लेखक का संदेश। • गरीबों की आवाज़ ज़रूरी • पुनर्वास का उचित प्रबंध हो • वैकल्पिक विकास-मार्ग तलाशें (छोटे बाँध, सौर ऊर्जा) • पर्यावरण और सांस्कृतिक मूल्यों का सम्मान चरण 7 — सुंदरलाल बहुगुणा से जुड़ाव। 'टिहरी डूबेगी, हम भी डूबेंगे' — पर्यावरणवादी आंदोलन का नारा। कहानी इस आंदोलन से प्रेरित। चरण 8 — आज की प्रासंगिकता। सरदार सरोवर, पोलावरम, केन-बेतवा — आज भी समस्या जारी। भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 कुछ हद तक राहत। ✦ उत्तर: 'माटी वाली' कहानी विकास और विस्थापन के विरोधाभास को मार्मिक ढंग से उजागर करती है। टिहरी बाँध के लाभ (विद्युत, पानी, सिंचाई) के बदले मानवीय कीमत — 1 लाख+ विस्थापित, सांस्कृतिक नाश, पर्यावरण-संकट। माटी वाली एक प्रतीक है — सब गरीब विस्थापितों का चेहरा। लेखक का संदेश — विकास के मानवीय और पर्यावरणीय पहलू भी विचार-योग्य। आज भी जब बड़ी परियोजनाओं से लाखों विस्थापित होते हैं, यह कहानी प्रासंगिक — गरीबों की आवाज़ सुनी जाए, पुनर्वास उचित हो, वैकल्पिक मार्ग तलाशे जाएँ।

5-minute revision

The whole chapter, distilled. Read this the night before the exam.

  • लेखक: विद्यासागर नौटियाल (1933-2012), 'टिहरी का लेखक'
  • जन्म: 29 सितंबर 1933, टिहरी (उत्तराखंड)
  • राजनीति: CPI (M)
  • साहित्य अकादमी 2008 — 'यमुना के बाग़ी बेटे'
  • मूल संग्रह: 'माटी वाली' (कहानी-संग्रह)
  • मुख्य पात्र: माटी वाली (60-65 वर्ष, अनाम बुज़ुर्ग); ठकुराइन; पति
  • धंधा: पीली, चिकनी मिट्टी बेचना (घरों की लीपाई के लिए)
  • टिहरी बाँध: भागीरथी पर, 260.5 मी ऊँचा, भारत का सबसे ऊँचा
  • निर्माण: 1978-2006
  • विस्थापित: 1 लाख+ लोग; पुरानी टिहरी डूबी
  • विरोध-नेता: सुंदरलाल बहुगुणा (चिपको आंदोलन)
  • अन्य रचनाएँ: भीम अकेला, सूरज सबका है, टिहरी 1948
  • केन्द्रीय मुद्दा: विकास बनाम विस्थापन

CBSE marks blueprint

Where the marks come from in this chapter — so you can plan your prep.

Typical chapter weightage: 4–5 अंक प्रति बोर्ड पेपर

Question typeMarks eachTypical countWhat it tests
बहुविकल्पीय / अति लघु11–2लेखक; पात्र; बाँध; नदी
लघु उत्तरीय31माटी वाली का जीवन; विस्थापन; गरीबी
दीर्घ उत्तरीय50–1विकास-विरोधाभास; सामाजिक संदेश; आज की प्रासंगिकता
Prep strategy
  • लेखक विद्यासागर नौटियाल — 'टिहरी का लेखक', साहित्य अकादमी 2008
  • टिहरी बाँध तथ्य: भागीरथी, 260.5 मी, 1978-2006, 1 लाख+ विस्थापित
  • माटी वाली का जीवन — गरीब, पति बीमार, मिट्टी बेचती
  • ठकुराइन के घर का दृश्य
  • विस्थापन की पीड़ा — 'मेरी मिट्टी कहाँ रहेगी?'
  • सुंदरलाल बहुगुणा और चिपको-आंदोलन से संबंध

Where this shows up in the real world

This chapter isn't just an exam topic — it lives in the world around you.

भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013

विस्थापितों के अधिकार, उचित मुआवज़ा, पुनर्वास की गारंटी — कानूनी ढाँचा।

Forest Rights Act 2006

आदिवासी और वन-निवासियों के अधिकार — विस्थापन से रक्षा।

सरदार सरोवर बाँध

नर्मदा पर — 4 लाख+ विस्थापित। आज भी विवाद। 'माटी वाली' की कहानी आज भी प्रासंगिक।

चिपको आंदोलन

1970s का पर्यावरण-आंदोलन — सुंदरलाल बहुगुणा द्वारा। पर्यावरण-संरक्षण का जीवंत उदाहरण।

Exam strategy

Battle-tested tips from teachers and toppers for this chapter.

  1. लेखक विद्यासागर नौटियाल — 'टिहरी का लेखक'
  2. टिहरी बाँध के तथ्य ज़रूर लिखें — 260.5 मी, भागीरथी, 1 लाख+ विस्थापित
  3. माटी वाली की दिनचर्या और गरीबी का चित्रण
  4. विस्थापन की पीड़ा — 'मेरी मिट्टी कहाँ रहेगी?'
  5. सुंदरलाल बहुगुणा और चिपको का उल्लेख — अंक बढ़ाएँ
  6. आज की प्रासंगिकता — सरदार सरोवर, पोलावरम

Going beyond the textbook

For olympiad aspirants and curious learners — topics that build on this chapter.

  • सुंदरलाल बहुगुणा और चिपको आंदोलन का इतिहास
  • नर्मदा बचाओ आंदोलन (मेधा पाटकर)
  • विस्थापन-साहित्य की परंपरा हिन्दी में
  • टिहरी 1948 — विद्यासागर नौटियाल का उपन्यास, रियासत के अंतिम दिन
  • Wenezuela's Sarajevo-paradigm — large dams worldwide विस्थापन

Where else this chapter is tested

CBSE board isn't the only one — other exams test this chapter too.

CBSE Board Class 9उच्च
हिन्दी ओलिंपियाडमध्यम
UGC NET हिन्दीउच्च — आँचलिक कथा
UPSC Geography Optionalमध्यम — विस्थापन-प्रबंधन
UPSC Environmentमध्यम — बाँध-परियोजना नैतिकता

Questions students ask

The real ones — pulled from the Q&A community and tutor sessions.

लाभ — 1000 MW विद्युत-उत्पादन + 1000 MW pumped storage; सिंचाई; दिल्ली को पीने का पानी; बाढ़-नियंत्रण। पर इसकी कीमत — 1 लाख+ विस्थापित, पुरानी टिहरी डूबी, पर्यावरण-नाश। विकास और कीमत का गहरा विरोधाभास।

प्रसिद्ध भारतीय पर्यावरणवादी (1927-2021)। 'चिपको आंदोलन' (1970s) के नायक — पेड़ों को गले लगाकर कटाई रोकी। टिहरी बाँध के विरुद्ध आंदोलन का नेतृत्व किया। 'टिहरी डूबेगी, हम भी डूबेंगे' — उनका प्रसिद्ध नारा।

अधूरा और असंतोषजनक। नई टिहरी, ऋषिकेश, देहरादून में पुनर्वास हुआ। मुआवज़ा अधूरा, सुविधाएँ अपर्याप्त, सांस्कृतिक संकट गहरा। आज भी कुछ विस्थापित न्याय की प्रतीक्षा में हैं।
Verified by the tuition.in editorial team
Last reviewed on 20 May 2026. Written and reviewed by subject-matter experts — read about our process.
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