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  • 1बछेन्द्री पाल और भारतीय पर्वतारोहण
  • 2एवरेस्ट और पर्वतारोहण की तकनीकी जानकारी
  • 3यात्रा-वृत्तांत की विशेषताएँ
  • 4स्त्री-सशक्तीकरण के प्रेरक उदाहरण
  • 5साहस और दृढ़ निश्चय का महत्व
💡
Why this chapter matters
बछेन्द्री पाल — एवरेस्ट चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला — का यात्रा-वृत्तांत स्त्री-शक्ति, साहस, और राष्ट्रीय गौरव का जीवंत दस्तावेज़।

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एवरेस्ट — मेरी शिखर यात्रा — कक्षा 9 हिन्दी B (स्पर्श)

"एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचकर मैंने वंदे मातरम् कहा और हनुमान चालीसा का पाठ किया।" — बछेन्द्री पाल, 23 मई 1984

1. पाठ-परिचय

'एवरेस्ट — मेरी शिखर यात्रा' एक प्रथम-व्यक्ति यात्रा-वृत्तांत है। बछेन्द्री पाल — एवरेस्ट चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला — ने अपनी ऐतिहासिक यात्रा का सजीव वर्णन किया है। 23 मई 1984 को उन्होंने 8848.86 मीटर ऊँचे एवरेस्ट के शिखर पर तिरंगा फहराया।

मुख्य भाव

  • स्त्री-शक्ति और साहस
  • कठिनाइयों पर विजय
  • टीम-वर्क का महत्व
  • राष्ट्रीय गौरव
  • प्रकृति-प्रेम और चुनौतियाँ

ऐतिहासिक तथ्य

  • एवरेस्ट को नेपाल में सागरमाथा, तिब्बत में चोमोलुङ्मा कहते हैं
  • विश्व का सबसे ऊँचा पर्वत
  • ऊँचाई: 8848.86 मीटर (29,031.7 फीट)
  • पहले विजेता (1953): एडमंड हिलेरी (NZ) और तेनज़िंग नोर्गे (नेपाल)
  • पहली महिला विजेता (1975): जुनको ताबेई (जापान)
  • पहली भारतीय महिला: बछेन्द्री पाल (1984)

2. लेखिका-परिचय — बछेन्द्री पाल

जीवनवृत्त

  • जन्म: 24 मई 1954, नकुरी गाँव (उत्तरकाशी, उत्तराखंड)
  • शिक्षा: एम.ए., बी.एड. (डी.ए.वी. कॉलेज, देहरादून)
  • पेशा: पर्वतारोही, संस्थान-संचालिका

प्रशिक्षण

  • नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM), उत्तरकाशी
  • 'A' ग्रेड के साथ उत्तीर्ण

एवरेस्ट विजय

  • तिथि: 23 मई 1984
  • दल: इंडो-नेपाल अभियान (पुरुषों के साथ)
  • समय: 1:07 बजे दोपहर
  • आयु: 30 वर्ष (एवरेस्ट विजय के समय)

सम्मान

  • पद्मश्री (1984)
  • अर्जुन पुरस्कार (1986)
  • पद्मभूषण (2019)
  • 1985 में 'गोल्ड मेडल' Indian Mountaineering Foundation से

बाद का कार्य

  • 'टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन' की संस्थापक
  • युवा पर्वतारोहियों का प्रशिक्षण
  • स्त्री-पर्वतारोहियों का समर्थन
  • 1997: 'सबसे ऊँचा एवरेस्ट परीक्षण' टीम

प्रमुख कार्य

  • 1981: नेहरू पर्वतारोहण संस्थान में प्रशिक्षण
  • 1984: एवरेस्ट विजय
  • 1993: 'पहली अखिल-महिला एवरेस्ट टीम' का नेतृत्व
  • 1994: गंगा-यात्रा (हरिद्वार से कलकत्ता)

3. पाठ का सारांश

प्रारंभ — दल का परिचय

इंडो-नेपाल अभियान 1984:

  • भारत और नेपाल का संयुक्त दल
  • 7 पुरुष + 1 महिला (बछेन्द्री)
  • नेतृत्व: कर्नल खुल्लर
  • शेरपा: अनुभवी नेपाली पर्वतारोही
  • तेज़िंग नोर्गे के पुत्र लोपसांग शेरपा भी टीम में

बेस कैम्प तक

यात्रा प्रारंभ:

  • काठमांडू से लुक्ला (हवाई जहाज़ से)
  • लुक्ला से नामचे बाज़ार (पैदल)
  • नामचे से डिंगबोचे (पैदल)
  • डिंगबोचे से लोबुचे
  • अंत में एवरेस्ट बेस कैम्प (5380 मीटर)

बेस कैम्प पर:

  • सभी तैयारियाँ
  • ऑक्सीजन के सिलेंडर
  • खाद्य सामग्री
  • तकनीकी उपकरण

चढ़ाई — कैम्प से कैम्प तक

कैम्प I (6065 मी):

  • खुम्बू आइसफ़ॉल — सबसे खतरनाक हिस्सा
  • बर्फ की दरारें (crevasses)
  • सीढ़ी-नालियाँ
  • एक हिमस्खलन में बछेन्द्री बच गईं

कैम्प II (6500 मी):

  • पश्चिमी कूम (Western Cwm)
  • अधिक ऑक्सीजन की कमी
  • सिरदर्द, थकान

कैम्प III (7300 मी):

  • लोह्त्से वाल पर
  • ऊँचाई का प्रभाव — साँस की कमी

कैम्प IV — साउथ कोल (7906 मी):

  • 'मृत्यु क्षेत्र' (Death Zone)
  • 8000 मी से ऊपर
  • शरीर धीरे-धीरे नष्ट होने लगता

महत्वपूर्ण घटना — हिमस्खलन

बछेन्द्री का अनुभव:

  • कैम्प III के पास
  • अचानक हिमस्खलन
  • बछेन्द्री बर्फ में दब गईं
  • शेरपा अंगडोरजी ने उन्हें बचाया
  • दल के अन्य सदस्य भी बचे
  • सब के मन में डर

बछेन्द्री का दृढ़ निश्चय:

  • "अब वापस नहीं जाऊँगी।"
  • "एवरेस्ट चढ़कर ही रहूँगी।"
  • शिखर पर पहुँचने का दृढ़ निश्चय

शिखर की ओर — अंतिम चढ़ाई

22 मई की रात:

  • कैम्प IV से शिखर के लिए प्रस्थान
  • आधी रात के बाद चलना शुरू
  • रात में टॉर्च की रोशनी से
  • सख्त ठंड, हवा, बर्फ़

हिलेरी स्टेप:

  • एवरेस्ट का अंतिम कठिन भाग
  • 12 मीटर की खड़ी चट्टान
  • 1953 में एडमंड हिलेरी ने पहली बार चढ़ी

विजय — 23 मई 1984, 1:07 PM

शिखर पर:

  • दोपहर 1:07 बजे एवरेस्ट के शिखर पर पहुँचीं
  • भारतीय तिरंगा फहराया
  • संयुक्त राष्ट्र का झंडा
  • नेपाली झंडा
  • 'ओम मणि पद्मे हुम' कहा (बौद्ध मंत्र)
  • हनुमान चालीसा पाठ
  • वंदे मातरम्

बछेन्द्री का अनुभव:

  • 'मैं स्तब्ध थी।'
  • 'पूरी पृथ्वी मेरे पैरों के नीचे।'
  • 'भारत-माँ के लिए एक नई पहचान।'
  • 'प्रकृति की महानता का साक्षात्कार।'

वापसी

नीचे की यात्रा:

  • शिखर से वापस आना
  • 45 मिनट शिखर पर रहीं
  • वापसी अधिक खतरनाक — थकान + ऑक्सीजन कम
  • सकुशल कैम्प IV पर पहुँचीं
  • फिर बेस कैम्प तक

घर वापसी

  • नई दिल्ली में स्वागत
  • राष्ट्रपति से मुलाकात
  • मीडिया का ध्यान
  • पद्मश्री से सम्मानित
  • भारतीय महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गईं

4. केन्द्रीय भाव और संदेश

मुख्य मुद्दे

  1. स्त्री-शक्ति: एक महिला सब कुछ कर सकती है।
  2. साहस: कठिनाइयों पर विजय।
  3. दृढ़ निश्चय: 'अब वापस नहीं'।
  4. टीम-वर्क: शेरपा, साथी, नेतृत्व का महत्व।
  5. राष्ट्रीय गौरव: तिरंगा एवरेस्ट पर।
  6. प्रकृति का सम्मान: पर्वत की महानता।

प्रेरक मूल्य

  • कोई भी सपना असंभव नहीं
  • तैयारी और मेहनत आवश्यक
  • टीम के बिना कोई बड़ा लक्ष्य नहीं
  • संकट में धैर्य
  • अपनी मातृभूमि से प्रेम

5. साहित्यिक विशेषताएँ

विधा

  • यात्रा-वृत्तांत (Travelogue)
  • आत्मकथात्मक (First-person)
  • ऐतिहासिक दस्तावेज़

भाषा

  • सरल खड़ी बोली
  • तकनीकी शब्दावली (पर्वतारोहण)
  • भावप्रवण विवरण
  • दृश्य-निर्माण की कला

शैली

  • वर्णनात्मक
  • संवादात्मक
  • क्रियाशील
  • रोमांचक

अलंकार

  • उपमा: 'पृथ्वी की छत'
  • रूपक: 'मृत्यु क्षेत्र' = 8000 मी ऊपर
  • विरोधाभास: छोटी महिला, बड़ा पर्वत
  • अनुप्रास: 'शिखर यात्रा'

रस

  • वीर रस — साहस का चित्रण
  • अद्भुत रस — एवरेस्ट का सौंदर्य
  • करुण रस — दुर्घटनाओं में

6. पर्वतारोहण — तकनीकी जानकारी

प्रमुख शब्द

  • बेस कैम्प: चढ़ाई का शुरुआती बिंदु
  • खुम्बू आइसफ़ॉल: एवरेस्ट का सबसे खतरनाक हिस्सा
  • हिलेरी स्टेप: एवरेस्ट की अंतिम चट्टान
  • मृत्यु क्षेत्र: 8000 मी से ऊपर का क्षेत्र
  • शेरपा: नेपाली पर्वतारोही (विशेषज्ञ)
  • क्रैम्पॉन: जूतों के नीचे लगे काँटे
  • हार्नेस: सुरक्षा-बेल्ट
  • रोप: रस्सी (साथियों को जोड़ती)
  • पाइटन: चट्टान में लगाने वाली कील

ऊँचाई के प्रभाव

  • 3000+ मी: हल्की साँस-कमी
  • 5000+ मी: सिरदर्द, थकान, उल्टी
  • 7000+ मी: ऑक्सीजन की कमी
  • 8000+ मी: 'मृत्यु क्षेत्र' — शरीर मरने लगता

सुरक्षा-उपकरण

  • ऑक्सीजन सिलेंडर
  • गरम कपड़े (down suit)
  • स्नो ग्लास
  • तंबू
  • भोजन (तकनीकी)
  • मेडिकल किट

7. एवरेस्ट — विस्तृत संदर्भ

भूगोल

  • नेपाल-तिब्बत सीमा पर
  • महालंगुर हिमाल पर्वत-शृंखला
  • ऊँचाई: 8848.86 मीटर (2020 में अद्यतन)
  • अक्षांश: 27°59'N; देशांतर: 86°55'E

नाम

  • सागरमाथा (नेपाली) — 'सागर का माथा'
  • चोमोलुङ्मा (तिब्बती) — 'पृथ्वी की देवी माँ'
  • एवरेस्ट (अंग्रेज़ी) — सर्वेक्षक जॉर्ज एवरेस्ट के नाम पर (1865)

इतिहास

  • 1953: एडमंड हिलेरी + तेन्ज़िंग नोर्गे — पहले विजेता
  • 1975: जुनको ताबेई (जापान) — पहली महिला
  • 1984: बछेन्द्री पाल — पहली भारतीय महिला
  • 2024: कमी रीता शेरपा (नेपाल) — सबसे अधिक बार (30 बार)

प्रसिद्ध भारतीय पर्वतारोही

  • अवतार सिंह चीमा (1965) — पहले भारतीय
  • फू दोरजी (1985) — दूसरे
  • बछेन्द्री पाल (1984) — पहली भारतीय महिला
  • संतोष यादव (1992-93) — दो बार एवरेस्ट
  • अरुणिमा सिन्हा (2013) — कृत्रिम पैर से एवरेस्ट
  • मलावथ पूर्णा (2014) — सबसे कम उम्र की भारतीय महिला (13 साल)
  • अनुष्का गायत्री (2020) — सबसे कम उम्र भारतीय जुड़वाँ

8. आज की प्रासंगिकता

स्त्री-सशक्तीकरण

  • बछेन्द्री = स्त्री-शक्ति का प्रतीक
  • 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' की प्रेरणा
  • अन्य स्त्री-पर्वतारोहियों के लिए मार्ग

एडवेंचर स्पोर्ट्स

  • भारत में बढ़ रहा
  • IMF (Indian Mountaineering Foundation)
  • NIM (Nehru Institute of Mountaineering)
  • युवाओं में लोकप्रिय

पर्यावरण की चिंता

  • एवरेस्ट पर कूड़े की समस्या
  • ग्लेशियर पिघलना
  • जलवायु परिवर्तन
  • 'स्वच्छ एवरेस्ट' अभियान

9. प्रमुख उद्धरण

"एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचकर मैंने वंदे मातरम् कहा।"

"मैं स्तब्ध थी। पूरी पृथ्वी मेरे पैरों के नीचे।"

"मेरे एवरेस्ट पर चढ़ने से लाखों भारतीय महिलाओं को प्रेरणा मिले।"


10. समापन

'एवरेस्ट — मेरी शिखर यात्रा' केवल एक यात्रा-वृत्तांत नहीं — यह स्त्री-शक्ति, साहस, और भारतीय गौरव का जीवंत दस्तावेज़ है। बछेन्द्री पाल ने 1984 में जो साहस दिखाया, वह आज भी लाखों भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा है। 23 मई 1984 का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित — पहली भारतीय महिला एवरेस्ट के शिखर पर। कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए यह पाठ — साहस, दृढ़ निश्चय, टीम-वर्क, और राष्ट्र-प्रेम का अद्भुत स्रोत।

Key formulas & results

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लेखिका
बछेन्द्री पाल (जन्म 24 मई 1954, उत्तरकाशी)
पहली भारतीय महिला जिसने एवरेस्ट चढ़ा
विजय-तिथि
23 मई 1984, दोपहर 1:07 बजे
30 वर्ष की उम्र में
एवरेस्ट ऊँचाई
8848.86 मीटर (29,031.7 फीट)
2020 में अद्यतन — पहले 8848 m थी
एवरेस्ट के नाम
नेपाली: सागरमाथा; तिब्बती: चोमोलुङ्मा; अंग्रेज़ी: एवरेस्ट
जॉर्ज एवरेस्ट के नाम पर
अभियान
इंडो-नेपाल अभियान 1984; नेतृत्व — कर्नल खुल्लर
7 पुरुष + 1 महिला
बछेन्द्री के पुरस्कार
पद्मश्री 1984, अर्जुन पुरस्कार 1986, पद्मभूषण 2019
विश्व में पहले विजेता
एडमंड हिलेरी + तेन्ज़िंग नोर्गे (1953)
पहली महिला (विश्व)
जुनको ताबेई (जापान, 1975)
बछेन्द्री से 9 साल पहले
⚠️

Common mistakes & fixes

These are the exact errors that cost students marks in board exams. Read them once, save yourself the trouble.

WATCH OUT
एवरेस्ट विजय की तिथि गलत
23 मई 1984, दोपहर 1:07 बजे। बछेन्द्री पाल पहली भारतीय महिला।
WATCH OUT
एवरेस्ट की ऊँचाई गलत
8848.86 मीटर (2020 में चीन-नेपाल संयुक्त सर्वेक्षण से)। पहले 8848 मानी जाती थी।
WATCH OUT
बछेन्द्री का जन्म-स्थान गलत
नकुरी गाँव, उत्तरकाशी (उत्तराखंड)। 24 मई 1954 को जन्म — विजय के एक दिन पहले उनका जन्मदिन था।
WATCH OUT
एवरेस्ट के पहले विजेता भूलना
29 मई 1953 — एडमंड हिलेरी (NZ) और तेन्ज़िंग नोर्गे (नेपाल) पहले विजेता। पहली महिला: जुनको ताबेई (जापान, 1975)।

Practice problems

Try each one yourself before tapping "Show solution". Active recall > rereading.

Q1EASY· तथ्य
बछेन्द्री पाल ने एवरेस्ट कब चढ़ा?
Show solution
✦ उत्तर: 23 मई 1984, दोपहर 1:07 बजे — एवरेस्ट चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला।
Q2EASY· ऊँचाई
एवरेस्ट की ऊँचाई और दूसरे नाम बताइए।
Show solution
✦ उत्तर: ऊँचाई 8848.86 मीटर (2020)। नाम: सागरमाथा (नेपाली), चोमोलुङ्मा (तिब्बती), एवरेस्ट (अंग्रेज़ी — जॉर्ज एवरेस्ट के नाम पर)।
Q3MEDIUM· चढ़ाई
एवरेस्ट चढ़ाई के मुख्य पड़ाव बताइए।
Show solution
चरण 1 — बेस कैम्प (5380 मी)। शुरुआती बिंदु। तैयारियाँ, ऑक्सीजन, खाद्य सामग्री। चरण 2 — कैम्प I (6065 मी)। खुम्बू आइसफ़ॉल — सबसे खतरनाक बर्फ-दरारों वाला हिस्सा। चरण 3 — कैम्प II (6500 मी)। पश्चिमी कूम (Western Cwm); ऑक्सीजन कम होने लगती। चरण 4 — कैम्प III (7300 मी)। लोह्त्से वाल पर; साँस की कमी। चरण 5 — कैम्प IV / साउथ कोल (7906 मी)। 'मृत्यु क्षेत्र' — 8000 मी से ऊपर; शरीर नष्ट होने लगता। चरण 6 — शिखर (8848.86 मी)। हिलेरी स्टेप पार करके; 23 मई 1984 दोपहर 1:07 पर। ✦ उत्तर: एवरेस्ट चढ़ाई 6 मुख्य पड़ावों में — बेस कैम्प (5380 मी) → कैम्प I (6065 मी, खुम्बू आइसफ़ॉल) → कैम्प II (6500 मी) → कैम्प III (7300 मी) → कैम्प IV/साउथ कोल (7906 मी, मृत्यु क्षेत्र) → हिलेरी स्टेप → शिखर (8848.86 मी)। हर पड़ाव अधिक खतरनाक — ऑक्सीजन कम, ठंड अधिक।
Q4MEDIUM· हिमस्खलन
हिमस्खलन की घटना और बछेन्द्री का दृढ़ निश्चय बताइए।
Show solution
चरण 1 — घटना। कैम्प III के पास अचानक हिमस्खलन। बछेन्द्री बर्फ़ में दब गईं। चरण 2 — बचाव। शेरपा अंगडोरजी ने उन्हें बर्फ़ से निकाला। दल के अन्य सदस्य भी बचे। चरण 3 — दल का डर। सब के मन में डर पैदा हुआ। कुछ साथी वापस लौटने के पक्ष में। चरण 4 — बछेन्द्री का दृढ़ निश्चय। उन्होंने स्पष्ट कहा — 'अब वापस नहीं जाऊँगी।' 'एवरेस्ट चढ़कर ही रहूँगी।' चरण 5 — साहस का प्रदर्शन। जान-जोखिम के बाद भी हार नहीं मानी। यह दृढ़ता उन्हें शिखर तक ले गई। चरण 6 — संदेश। कठिनाई या मृत्यु-संकट के बाद भी लक्ष्य की प्रति निष्ठा — साहस का सच्चा रूप। ✦ उत्तर: कैम्प III के पास हिमस्खलन में बछेन्द्री बर्फ़ में दब गईं — शेरपा अंगडोरजी ने बचाया। दल में डर फैला, कुछ वापसी के पक्ष में। पर बछेन्द्री ने दृढ़ता से कहा — 'अब वापस नहीं जाऊँगी, एवरेस्ट चढ़कर ही रहूँगी।' यह दृढ़ निश्चय और साहस उन्हें शिखर तक ले गया। मृत्यु-संकट के बाद भी हार न मानना — सच्चे साहस का उदाहरण।
Q5HARD· विश्लेषण
बछेन्द्री पाल की एवरेस्ट विजय भारतीय स्त्री-सशक्तीकरण के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
Show solution
चरण 1 — ऐतिहासिक महत्व। 23 मई 1984 — बछेन्द्री पहली भारतीय महिला बनीं जिसने एवरेस्ट चढ़ा। 30 साल की उम्र में यह उपलब्धि। चरण 2 — सामाजिक संदर्भ। 1984 में भारत में स्त्री-सशक्तीकरण प्रारम्भिक चरण में। ग्रामीण उत्तराखंड की एक साधारण कन्या ने यह कर दिखाया। चरण 3 — प्रेरणा-स्रोत। • लाखों भारतीय लड़कियों के लिए प्रेरणा • 'स्त्री कुछ भी कर सकती है' का संदेश • खेल-एडवेंचर में महिला-भागीदारी बढ़ी • करियर के नए विकल्प चरण 4 — बाद का योगदान। • टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन की संस्थापक • 1993: पहली अखिल-महिला एवरेस्ट टीम का नेतृत्व • युवा महिला-पर्वतारोहियों का प्रशिक्षण चरण 5 — नई पीढ़ी। • संतोष यादव (1992-93): दो बार एवरेस्ट • अरुणिमा सिन्हा (2013): कृत्रिम पैर से • मलावथ पूर्णा (2014): 13 साल की उम्र सब बछेन्द्री से प्रेरित। चरण 6 — पुरस्कार। पद्मश्री 1984, अर्जुन पुरस्कार 1986, पद्मभूषण 2019 — सरकारी मान्यता। चरण 7 — आज की प्रासंगिकता। • महिला आरक्षण विधेयक 2023 (33%) • Beti Bachao Beti Padhao • Khelo India में महिला-भागीदारी बछेन्द्री इस यात्रा की प्रथम सूत्रधार। चरण 8 — मूल्यांकन। बछेन्द्री की एवरेस्ट विजय केवल खेल-उपलब्धि नहीं — एक सांस्कृतिक मील का पत्थर। उन्होंने सिद्ध किया कि स्त्री-पुरुष में कोई शारीरिक-मानसिक सीमा नहीं। साहस, मेहनत, और सपने सब के लिए समान। ✦ उत्तर: बछेन्द्री पाल की 23 मई 1984 की एवरेस्ट विजय भारतीय स्त्री-सशक्तीकरण का मील का पत्थर। उत्तराखंड की एक साधारण कन्या ने सिद्ध किया कि स्त्री किसी भी क्षेत्र में पुरुष से कम नहीं। उनकी प्रेरणा से संतोष यादव, अरुणिमा सिन्हा, मलावथ पूर्णा जैसी कई भारतीय महिलाएँ एवरेस्ट चढ़ीं। टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन की संस्थापक बनकर युवा महिलाओं को प्रशिक्षण देती हैं। पद्मश्री, पद्मभूषण से सम्मानित। आज के Beti Bachao, महिला-आरक्षण के युग में बछेन्द्री प्रेरणा-स्रोत बनी हुई हैं।

5-minute revision

The whole chapter, distilled. Read this the night before the exam.

  • लेखिका: बछेन्द्री पाल, जन्म 24 मई 1954, नकुरी (उत्तरकाशी, उत्तराखंड)
  • एवरेस्ट विजय: 23 मई 1984, 1:07 PM — पहली भारतीय महिला
  • उम्र विजय के समय: 30 वर्ष
  • एवरेस्ट ऊँचाई: 8848.86 मीटर (2020 में अद्यतन)
  • एवरेस्ट के नाम: सागरमाथा (नेपाली), चोमोलुङ्मा (तिब्बती)
  • विश्व के पहले विजेता: एडमंड हिलेरी + तेन्ज़िंग नोर्गे (1953)
  • विश्व की पहली महिला विजेता: जुनको ताबेई (जापान, 1975)
  • अभियान: इंडो-नेपाल, नेतृत्व कर्नल खुल्लर
  • बेस कैम्प: 5380 मी; कैम्प IV: 7906 मी (साउथ कोल/मृत्यु क्षेत्र)
  • खुम्बू आइसफ़ॉल — सबसे खतरनाक हिस्सा
  • हिमस्खलन घटना — शेरपा अंगडोरजी ने बछेन्द्री को बचाया
  • शिखर पर: तिरंगा, हनुमान चालीसा, वंदे मातरम्
  • पुरस्कार: पद्मश्री 1984, अर्जुन 1986, पद्मभूषण 2019
  • बाद का कार्य: Tata Steel Adventure Foundation की संस्थापक
  • प्रेरणा-स्रोत: संतोष यादव, अरुणिमा सिन्हा, मलावथ पूर्णा

CBSE marks blueprint

Where the marks come from in this chapter — so you can plan your prep.

Typical chapter weightage: 5–6 अंक प्रति बोर्ड पेपर

Question typeMarks eachTypical countWhat it tests
बहुविकल्पीय / अति लघु11–2लेखिका; तिथि; ऊँचाई; नाम
लघु उत्तरीय31चढ़ाई के पड़ाव; हिमस्खलन; शिखर का अनुभव
दीर्घ उत्तरीय50–1स्त्री-सशक्तीकरण; साहस; राष्ट्रीय गौरव
Prep strategy
  • बछेन्द्री पाल — जन्म 24 मई 1954, नकुरी (उत्तरकाशी)
  • विजय: 23 मई 1984, दोपहर 1:07 बजे
  • एवरेस्ट: 8848.86 मी, नाम — सागरमाथा/चोमोलुङ्मा
  • अभियान: इंडो-नेपाल; नेतृत्व कर्नल खुल्लर
  • 6 पड़ाव: बेस → कैम्प I (खुम्बू) → II → III → IV (साउथ कोल) → शिखर
  • हिमस्खलन — शेरपा अंगडोरजी ने बचाया
  • पुरस्कार: पद्मश्री 1984, पद्मभूषण 2019

Where this shows up in the real world

This chapter isn't just an exam topic — it lives in the world around you.

Nehru Institute of Mountaineering (NIM), उत्तरकाशी

भारत की प्रमुख पर्वतारोहण प्रशिक्षण संस्था — बछेन्द्री यहीं से प्रशिक्षित।

Tata Steel Adventure Foundation

बछेन्द्री द्वारा स्थापित — युवा पर्वतारोहियों, विशेषकर महिलाओं का प्रशिक्षण।

Indian Mountaineering Foundation

भारत की मुख्य पर्वतारोहण संस्था — पर्वत-अभियानों का समन्वय।

Khelo India

भारत सरकार की खेल-योजना — एडवेंचर स्पोर्ट्स को भी प्रोत्साहन।

Exam strategy

Battle-tested tips from teachers and toppers for this chapter.

  1. बछेन्द्री का परिचय — जन्म, स्थान, पहली भारतीय महिला
  2. विजय की तिथि और समय ज़रूर लिखें — 23 मई 1984, 1:07 PM
  3. एवरेस्ट के तीन नाम (सागरमाथा, चोमोलुङ्मा, एवरेस्ट)
  4. मुख्य पड़ावों का क्रम — बेस कैम्प से शिखर तक
  5. हिमस्खलन और दृढ़ निश्चय का प्रसंग
  6. शिखर पर हनुमान चालीसा, तिरंगा का उल्लेख
  7. स्त्री-सशक्तीकरण के संदेश पर बल

Going beyond the textbook

For olympiad aspirants and curious learners — topics that build on this chapter.

  • एवरेस्ट चढ़ाई के सभी मार्ग — South Col Route (Nepal), North Ridge (Tibet)
  • Seven Summits — सभी महाद्वीपों के सर्वोच्च शिखर
  • एडमंड हिलेरी और तेन्ज़िंग नोर्गे — पहली एवरेस्ट विजय (1953)
  • जुनको ताबेई — पहली महिला एवरेस्ट (1975)
  • अरुणिमा सिन्हा — कृत्रिम पैर से एवरेस्ट (2013)
  • एवरेस्ट पर पर्यावरण-संकट: कूड़ा, ग्लेशियर पिघलना

Where else this chapter is tested

CBSE board isn't the only one — other exams test this chapter too.

CBSE Board Class 9उच्च
हिन्दी ओलिंपियाडमध्यम
UGC NET हिन्दीमध्यम — यात्रा-वृत्तांत
UPSC Geographyमध्यम — हिमालय-भूगोल
स्पोर्ट्स अथॉरिटी पुरस्कारउच्च — पर्वतारोहण इतिहास

Questions students ask

The real ones — pulled from the Q&A community and tutor sessions.

1865 में ब्रिटिश सर्वेक्षक सर जॉर्ज एवरेस्ट के नाम पर — वे भारत के पूर्व सर्वेयर-जनरल थे। उनके पहले स्थानीय नाम — नेपाल में 'सागरमाथा' (सागर का माथा), तिब्बत में 'चोमोलुङ्मा' (पृथ्वी की देवी माँ)। 2002 में नेपाल ने आधिकारिक तौर पर सागरमाथा का प्रयोग शुरू किया।

8000 मीटर से ऊपर का क्षेत्र। यहाँ ऑक्सीजन सामान्य से 1/3 होती है। शरीर स्वयं नष्ट होने लगता — कोशिकाएँ मरने लगती हैं। ज़्यादा समय रहने पर मस्तिष्क-शोफ़, फेफड़ों में पानी आ सकता। एवरेस्ट के साउथ कोल (7906 मी) से शिखर (8848.86 मी) तक का पूरा क्षेत्र मृत्यु क्षेत्र में।

एक एवरेस्ट चढ़ाई पर $30,000-$100,000 (₹25 लाख से ₹85 लाख) खर्च। इसमें — नेपाल सरकार का पर्वत-शुल्क ($11,000), शेरपा-गाइड, ऑक्सीजन, उपकरण, ट्रेनिंग, बीमा, यात्रा। बछेन्द्री के समय यह सरकारी अभियान था — आज ज़्यादातर व्यक्तिगत।
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