गिरिधर कविराय की कुंडलिया — कक्षा 7 हिंदी (CBSE)
कक्षा 7 हिंदी मल्हार का छठा पाठ — गिरिधर कविराय की कुंडलियाँ। ये नीति-परक छंद व्यावहारिक जीवन की सीख देते हैं।
1. पाठ का परिचय
- विधा: कविता (कुंडलिया छंद)।
- कवि: गिरिधर कविराय (नीति के कवि)।
- पढ़ते समय ध्यान दें: हर कुंडलिया क्या व्यावहारिक सीख देती है।
2. कुंडलिया छंद क्या है?
कुंडलिया एक छह पंक्तियों का छंद है, जो एक दोहा और एक रोला के मेल से बनता है। इसकी विशेषता यह है कि जिस शब्द से कुंडलिया शुरू होती है, उसी शब्द पर वह समाप्त भी होती है — इस तरह यह कुंडली (घेरे) की तरह जुड़ जाती है, इसी से इसका नाम 'कुंडलिया' पड़ा।
3. सार
इस पाठ में गिरिधर कविराय की कुछ कुंडलियाँ दी गई हैं। ये नीति-परक (व्यावहारिक जीवन-ज्ञान वाली) कविताएँ हैं। कवि सरल और रोचक ढंग से जीवन की सीख देते हैं — जैसे सोच-समझकर काम करना, समय और परिस्थिति को पहचानना, अच्छी संगति रखना और व्यावहारिक बुद्धि से चलना। हर कुंडलिया एक छोटी-सी सीख अपने भीतर समेटे है, जो आज भी हमारे जीवन में काम आती है।
4. शब्द-अर्थ और भाषा अभ्यास
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| कुंडलिया | छह पंक्तियों का छंद (दोहा + रोला) |
| नीति | व्यावहारिक जीवन-ज्ञान, सही आचरण |
| कविराय | कवि (आदरसूचक) |
| संगति | साथ, संग |
| विवेक | सही-गलत की समझ |
अभ्यास:
- पाठ से 5 नए शब्द चुनकर अर्थ लिखिए।
- कुंडलिया छंद की दो विशेषताएँ लिखिए।
- "नीति" से अपना वाक्य बनाइए।
5. लिखित उत्तर का तरीका
- कुंडलिया का भाव सरल शब्दों में समझाइए।
- उत्तर पूरे वाक्य में दीजिए।
- "क्या सीख मिलती है" वाले प्रश्न में सीख स्पष्ट लिखिए।
6. रचनात्मक लेखन
विषय: अपने जीवन की कोई एक नीति-बात (सीख) उदाहरण सहित 4-5 वाक्यों में लिखिए।
7. सामान्य गलतियाँ
- गलती: कुंडलिया को साधारण कविता समझ लेना। सुधार: यह दोहा + रोला से बना विशेष छंद है, जो उसी शब्द पर समाप्त होता है जिससे आरंभ हुआ।
- गलती: केवल अर्थ लिखना, सीख न बताना। सुधार: हर कुंडलिया की नीति/सीख अवश्य लिखिए।
- गलती: एक शब्द में उत्तर देना। सुधार: पूरे वाक्य में उत्तर लिखिए।
8. प्रश्न-उत्तर (अभ्यास)
- इन कुंडलियों के रचयिता कौन हैं?
- कुंडलिया छंद किन दो छंदों से मिलकर बनता है?
- कुंडलिया का यह नाम क्यों पड़ा?
- गिरिधर की कुंडलियाँ किस प्रकार की हैं?
- "नीति" का अर्थ लिखिए।
9. उत्तर-कुंजी
- गिरिधर कविराय।
- दोहा और रोला से।
- क्योंकि यह उसी शब्द पर समाप्त होती है जिससे आरंभ होती है, इस तरह कुंडली (घेरे) की तरह जुड़ जाती है।
- नीति-परक — व्यावहारिक जीवन-ज्ञान देने वाली।
- नीति का अर्थ है व्यावहारिक जीवन-ज्ञान या सही आचरण।
10. तेज़ दोहराव
- विधा: कविता (कुंडलिया छंद); कवि: गिरिधर कविराय।
- कुंडलिया = दोहा + रोला, छह पंक्तियाँ; जिस शब्द से आरंभ, उसी पर अंत।
- ये नीति-परक कविताएँ हैं।
- हर कुंडलिया एक व्यावहारिक सीख देती है।
- उत्तर में सीख स्पष्ट लिखिए।
