By the end of this chapter you'll be able to…

  • 1Recite 3-4 key dohe with correct pronunciation and rhythm (13-11 matra break)
  • 2Explain the bhavarth (meaning) of each doha in simple Hindi prose
  • 3Identify the doha chhand — 24 matras, yati at 13 and 11
  • 4Extract the life lesson from each doha: water conservation, respecting small things, testing friendship in adversity
  • 5Recognize Rahim's technique: using everyday objects (water, needle, sword, salt) to convey deep philosophy
  • 6Write a paragraph connecting Rahim's water-conservation message to contemporary environmental concerns
💡
Why this chapter matters
Rahim's dohe (couplets) are among the most quoted verses in Hindi — and for good reason. In just two lines of 24 matras each, Rahim packs a complete life lesson using everyday imagery (water, a needle, a sword, salt). This chapter introduces students to the doha chhand (a 24-matra meter with caesura at 13 and 11) and to the idea that poetry need not be long or complex to be profound. Rahim — a Muslim poet in Akbar's court writing in Braj Bhasha — also embodies India's composite culture. His dohe on water conservation ('Rahiman pani rakhiye'), on respecting small things ('jahan kaam aave sui'), and on true friendship ('vipati') are life skills disguised as poetry.

Before you start — revise these

A 5-minute refresher here will save you 30 minutes of confusion below.

रहीम के दोहे — कक्षा 6 हिंदी (मल्हार)

"रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून।।" — रहीम

1. पाठ के बारे में

यह पाठ मध्यकाल के महान कवि रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) के चुनिंदा दोहों का संकलन है। रहीम अकबर के नवरत्नों में से एक थे — एक मुसलमान होकर ब्रज भाषा में हिंदी कविता लिखना उनके व्यक्तित्व की विशालता को दर्शाता है। उनके दोहे केवल 24 मात्राओं में जीवन का सार समेट देते हैं।

यह पाठ क्यों महत्वपूर्ण है

  • दोहा छंद का परिचय — 24 मात्राएँ, 13-11 पर यति
  • रहीम की विशेषता: रोज़मर्रा की वस्तुओं (पानी, सुई, तलवार, नमक) से गहन दर्शन
  • भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत — मुस्लिम कवि का ब्रज भाषा में हिंदी काव्य

2. कवि-परिचय

रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना, 1556-1627)

  • अकबर के नवरत्नों में से एक — कवि, सेनापति और विद्वान
  • माता-पिता: बैरम ख़ाँ और सुल्ताना बेगम
  • हिंदी, फ़ारसी, अरबी, संस्कृत — अनेक भाषाओं के ज्ञाता
  • प्रमुख रचनाएँ: 'रहीम सतसई', 'रहीम रत्नावली', 'शृंगार सोरठा', 'मदनाष्टक'
  • विशेषता: सरल भाषा में गूढ़ जीवन-दर्शन, दैनिक जीवन की वस्तुओं से उदाहरण

3. दोहे और भावार्थ (NCERT मल्हार पाठ्यपुस्तक से)

दोहा 1: पानी का महत्व

रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून।।

भावार्थ: रहीम कहते हैं — पानी को सुरक्षित रखो, इसके बिना सब सूना (खाली, अर्थहीन) है। पानी के न रहने पर न मोती बन सकता है (सीप में), न मनुष्य जीवित रह सकता है, न आटा (अन्न) पैदा हो सकता है। जल ही समस्त सृष्टि और जीवन का आधार है।

दोहा 2: लघु की महत्ता

रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तरवारि।।

भावार्थ: बड़ी वस्तुओं को देखकर छोटी चीज़ों को फेंक मत दो (तुच्छ मत समझो)। जहाँ सुई काम आती है, वहाँ तलवार क्या कर सकती है? हर चीज़ का अपना स्थान और महत्व है।

दोहा 3: सच्ची मित्रता

रहिमन विपति बिद्यमान, सोई जानै कौन। जो जाको राखै संग, सोई ताको लोन।।

भावार्थ: विपत्ति (मुसीबत) के समय ही पता चलता है कि सच्चा कौन है। जो मुसीबत में साथ दे, वही सच्चा मित्र है — जैसे जिसका नमक खाया, उसके प्रति वफ़ादार रहना चाहिए।


4. दोहा छंद का परिचय

  • मात्राएँ: 24 (पहला चरण: 13, दूसरा: 11)
  • यति (विराम): 13वीं मात्रा के बाद
  • मात्रा गणना नियम: ह्रस्व स्वर = 1 मात्रा, दीर्घ स्वर = 2 मात्राएँ
  • उदाहरण: "रहिमन देखि बड़ेन को" = 13 मात्राएँ, "लघु न दीजिए डारि" = 11 मात्राएँ

5. हम क्या सीखते हैं

मूल्यदोहासंदेश
जल-संरक्षण"पानी राखिए"जल के बिना जीवन असंभव
सम्मान"सुई-तलवार"हर चीज़/व्यक्ति का अपना महत्व
सच्ची मित्रता"विपति"मुसीबत में साथ देने वाला ही सच्चा

6. प्रमुख शब्दार्थ

  • ऊबरै: बचना, सुरक्षित रहना
  • चून: आटा — अन्न का पिसा रूप, भोजन का प्रतीक
  • लघु: छोटा — आकार या सामाजिक स्थिति में
  • तरवारि: तलवार — बड़ी और शक्तिशाली वस्तु का प्रतीक
  • विपति: मुसीबत, संकट, कठिनाई का समय
  • लोन: नमक — 'नमक खाना' मुहावरे से: वफ़ादारी का प्रतीक
  • बिद्यमान: विद्यमान — मौजूद, उपस्थित

7. अभ्यास

अभ्यास 1: भावार्थ

  1. "रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून" — भावार्थ लिखिए।
  2. "जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तरवारि" — यह दोहा हमें क्या सिखाता है?
  3. रहीम के अनुसार सच्चे मित्र की पहचान कैसे होती है?

अभ्यास 2: छंद-अध्ययन

दोहा छंद की परिभाषा लिखिए और किसी एक दोहे में मात्राओं की गणना करके दिखाइए।

अभ्यास 3: चर्चा

"रहीम का 'पानी राखिए' वाला दोहा आज जलवायु-परिवर्तन के युग में कितना प्रासंगिक है?"


8. हल किए गए उदाहरण

उदाहरण: 'जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तरवारि' का व्यावहारिक अर्थ

  • स्कूल प्रोजेक्ट में: लीडर (तलवार) और सहयोगी (सुई) — दोनों ज़रूरी
  • खेल में: स्टार खिलाड़ी और टीम के बाकी सदस्य — सबका योगदान
  • समाज में: बड़े पद और छोटे पद — हर काम का अपना सम्मान

9. निष्कर्ष

रहीम के दोहे 400 साल बाद भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उनकी सबसे बड़ी शक्ति है — सरलता में गहराई। पानी, सुई, तलवार, नमक — ये रोज़ की चीज़ें हैं, पर रहीम इनसे जीवन का दर्शन समझा देते हैं। यही एक महान कवि की पहचान है।

⚠️

Common mistakes & fixes

These are the exact errors that cost students marks in board exams. Read them once, save yourself the trouble.

WATCH OUT
Taking the dohe literally without understanding the deep meaning
Rahim's dohe use simple objects as symbols. 'Pani' (water) is not just H2O — it represents ALL essential resources without which life is impossible. 'Sui' (needle) and 'tarwar' (sword) represent the idea that every tool has its specific use — being 'bigger' doesn't mean 'better.' Always look for the symbolic meaning behind the literal words.
WATCH OUT
Miscounting matras in the doha chhand
Remember: दोहा = 24 matras total, with a break (yati) at 13 and 11. Each character's matra: short vowel (ह्रस्व) = 1, long vowel (दीर्घ) = 2. Practice counting on one doha until it becomes automatic.
WATCH OUT
Confusing Rahim with other Bhakti poets like Kabir or Tulsidas
Rahim (1556-1627) was a Mughal courtier — Abdul Rahim Khan-e-Khana — one of Akbar's Navratnas. Kabir was a 15th-century saint-poet. Tulsidas wrote Ramcharitmanas. All three wrote dohe, but they are different people from different times and traditions.

Practice problems

Try each one yourself before tapping "Show solution". Active recall > rereading.

Q1EASY· भावार्थ
'रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून' — इस दोहे का भावार्थ लिखिए।
Show solution
✦ उत्तर: रहीम कहते हैं कि पानी को सुरक्षित रखो (बचाओ)। पानी के बिना सब कुछ सूना (खाली, अर्थहीन) है। पानी न रहने पर न तो मोती बन सकता है (सीपी में), न मनुष्य जीवित रह सकता है, न आटा (अन्न) पैदा हो सकता है। अर्थात जल ही सृष्टि और जीवन का आधार है — इसकी रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है।
Q2MEDIUM· छंद
'रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि' — इस दोहे में दोहा छंद के लक्षण स्पष्ट कीजिए।
Show solution
✦ उत्तर: यह एक दोहा छंद है। दोहे में 24 मात्राएँ होती हैं — पहले चरण (पंक्ति) में 13 और दूसरे में 11 मात्राएँ। यति (विराम) 13वीं मात्रा के बाद आती है। मात्रा-गणना: 'रहिमन देखि बड़ेन को' = 13 मात्राएँ (ह्रस्व=1, दीर्घ=2 के नियम से) 'लघु न दीजिए डारि' = 11 मात्राएँ यति 13 के बाद। यह दोहा छंद का पूर्ण उदाहरण है।

5-minute revision

The whole chapter, distilled. Read this the night before the exam.

  • कवि: रहीम (अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना, 1556-1627) — अकबर के नवरत्न, कवि और सेनापति
  • छंद: दोहा — 24 मात्राएँ (पहला चरण: 13, दूसरा: 11), यति 13वीं मात्रा के बाद
  • दोहा 1 (जल-संरक्षण): पानी के बिना मोती, मानुष और चून — कुछ भी संभव नहीं
  • दोहा 2 (लघु की महत्ता): जहाँ सुई काम आती है, वहाँ तलवार बेकार — हर चीज़ का अपना मूल्य
  • दोहा 3 (मित्रता): विपत्ति में साथ देने वाला ही सच्चा मित्र — नमक का कर्ज़
  • रहीम की विशेषता: सरल भाषा में गूढ़ जीवन-दर्शन, रोज़मर्रा की वस्तुओं से उदाहरण

CBSE marks blueprint

Where the marks come from in this chapter — so you can plan your prep.

Where this shows up in the real world

This chapter isn't just an exam topic — it lives in the world around you.

जल-संरक्षण की प्राचीन भारतीय समझ

रहीम का 'पानी राखिए' वाला दोहा 16वीं शताब्दी का है — लेकिन आज जलवायु परिवर्तन और जल-संकट के युग में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। यह दिखाता है कि पर्यावरण-चेतना भारतीय चिंतन में सदियों से रची-बसी है।

टीम-वर्क और सम्मान का पाठ

'जहाँ काम आवे सुई' दोहा कार्यस्थल और स्कूल-प्रोजेक्ट दोनों में लागू होता है। हर व्यक्ति का अपना योगदान है — लीडर (तलवार) और सहयोगी (सुई) दोनों आवश्यक हैं। किसी को छोटा समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए।

Exam strategy

Battle-tested tips from teachers and toppers for this chapter.

  1. भावार्थ लिखते समय: पहले दोहे का शब्दार्थ, फिर भावार्थ, अंत में जीवन-संदेश — यही क्रम सर्वोत्तम है।
  2. दोहा छंद: 24 मात्राएँ, 13+11, यति — ये तीन बिंदु अवश्य लिखें। एक उदाहरण सहित।
  3. कवि-परिचय: अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना, अकबर के नवरत्न — यह 1-mark का छोटा प्रश्न हो सकता है।

Questions students ask

The real ones — pulled from the Q&A community and tutor sessions.

रहीम अकबर के दरबार में थे जहाँ हिंदी-संस्कृत और फ़ारसी दोनों भाषाओं का सम्मान था। वे स्वयं एक विद्वान थे जो संस्कृत, फ़ारसी, अरबी और हिंदी जानते थे। ब्रज भाषा में दोहे लिखना उस समय की साहित्यिक परंपरा थी। रहीम इस बात के जीवंत प्रमाण हैं कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा साझा है — हिंदू-मुस्लिम एकता का सुंदर उदाहरण।

दोहे में 24 मात्राएँ होती हैं (13+11) और यह दो पंक्तियों का छंद है। चौपाई में 16 मात्राएँ प्रति चरण होती हैं और यह चार चरणों (पंक्तियों) का छंद है। दोहा स्वतंत्र रूप से पूर्ण अर्थ देता है; चौपाई आमतौर पर बड़ी रचना का हिस्सा होती है। उदाहरण: रहीम के दोहे (2 पंक्तियाँ), तुलसीदास की रामचरितमानस की चौपाइयाँ (4 पंक्तियाँ)।
Verified by the tuition.in editorial team
Last reviewed on 1 June 2026. Written and reviewed by subject-matter experts — read about our process.
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