By the end of this chapter you'll be able to…

  • 1Recite the poem with appropriate rhythm and emotion, emphasizing the excitement of the descending drop
  • 2Explain the personification: how the drop is portrayed as a living, eager being
  • 3Identify मानवीकरण अलंकार and अनुप्रास अलंकार with examples from the poem
  • 4Describe the transformation: how the earth changes when the first drop falls
  • 5Connect the poem's message to environmental awareness — why every drop matters
💡
Why this chapter matters
Ayodhya Singh Upadhyay 'Hariaudh's 'Pahali Boond' is one of the finest examples of nature poetry in the Hindi curriculum. The poem personifies the first raindrop — giving it human emotions of excitement (umang) and purpose — to teach students that even the smallest things in nature carry immense significance. The drop is not just water; it is a messenger of life, a bringer of joy to the parched earth. For Class 6 students, this poem is an introduction to personification (मानवीकरण अलंकार) as a poetic device and to the idea that poetry can make us SEE ordinary things — like rain — with new eyes.

Before you start — revise these

A 5-minute refresher here will save you 30 minutes of confusion below.

पहली बूँद — कक्षा 6 हिंदी (मल्हार)

"चली बूँद एक अति उमंग से, लगी गगन से धरती बन ठनी।" — अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'

1. पाठ के बारे में

'पहली बूँद' कवि अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की एक सुंदर प्रकृति-कविता है। इसमें कवि ने आकाश से धरती पर गिरने वाली वर्षा की पहली बूँद का इतना जीवंत और कोमल चित्रण किया है कि बूँद हमें कोई निर्जीव वस्तु नहीं — एक जीवंत, उत्साही पात्र लगने लगती है। यह मानवीकरण अलंकार का उत्कृष्ट उदाहरण है।

यह पाठ क्यों महत्वपूर्ण है

  • मानवीकरण अलंकार का पाठ्यपुस्तक में सबसे स्पष्ट उदाहरण
  • प्रकृति-चित्रण की कला सिखाता है — हर छोटी चीज़ को गहराई से देखना
  • खड़ी बोली हिंदी के प्रारंभिक कवियों में से एक से परिचय

2. कवि-परिचय

अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' (1865-1947)

  • खड़ी बोली हिंदी के प्रारंभिक और प्रमुख कवियों में से एक
  • इनकी रचना 'प्रिय प्रवास' हिंदी का पहला महाकाव्य माना जाता है
  • भाषा सरल, भाव गहन — प्रकृति और मानव-मन दोनों का सुंदर चित्रण
  • 'हरिऔध' उपनाम से प्रसिद्ध

3. कविता (NCERT मल्हार पाठ्यपुस्तक से)

चली बूँद एक अति उमंग से, लगी गगन से धरती बन ठनी। छूटा जलदों का संग, धरा पर प्रीति नई कुछ जगी, कुछ सजी।

पवन उछाल रही, पर न डिगी, वह अपने पथ पर बढ़ी अकेली। देख धरा की प्यास, वह द्रवित हुई, बरसी प्रेम-बूँद बनके न्यारी।


4. भावार्थ

कवि वर्षा की पहली बूँद की यात्रा का वर्णन करता है:

  • बूँद आकाश से अत्यधिक उमंग (उत्साह) के साथ चलती है — मानो वह कोई जीवंत प्राणी हो
  • उसने बादलों का साथ छोड़ा और धरती पर नया प्रेम जगाने आई
  • हवा उसे डिगाने का प्रयास करती है — पर बूँद अपने पथ पर अडिग रहती है
  • धरती की प्यास देखकर बूँद द्रवित (पिघल) जाती है और प्रेम की बूँद बनकर बरसती है

कवि एक छोटी-सी बूँद को नायिका बना देता है — जिसमें उत्साह, दृढ़ता, करुणा और प्रेम जैसे मानवीय गुण हैं।


5. प्रमुख अलंकार

मानवीकरण अलंकार

  • परिभाषा: जब किसी निर्जीव वस्तु, प्रकृति या पशु-पक्षी में मानवीय भावनाएँ, क्रियाएँ और गुण आरोपित किए जाएँ
  • उदाहरण: "चली बूँद एक अति उमंग से" — बूँद (निर्जीव) का उमंग (मानवीय भाव) से चलना
  • उदाहरण: "देख धरा की प्यास, वह द्रवित हुई" — बूँद का द्रवित (करुणा से पिघलना) होना

अनुप्रास अलंकार

  • उदाहरण: "प्रीति नई कुछ जगी, कुछ सजी" — 'प', 'क' वर्णों की आवृत्ति

6. हम क्या सीखते हैं

मूल्यकविता कैसे दर्शाती है
उत्साहबूँद का 'उमंग' से चलना — हर काम उत्साह से करना चाहिए
दृढ़ताहवा के डिगाने पर भी बूँद का अपने पथ पर बढ़ते रहना
करुणाधरती की प्यास देखकर बूँद का द्रवित होना
प्रकृति-प्रेमएक छोटी-सी बूँद में भी कवि को इतना सौंदर्य दिखना

7. प्रमुख शब्दार्थ

  • उमंग: अत्यधिक उत्साह, जोश और हर्ष
  • गगन: आकाश
  • बन ठनी: सज-धजकर, सुंदर रूप धारण करके
  • जलद: बादल (जल देने वाला)
  • धरा: धरती, पृथ्वी
  • द्रवित: पिघला हुआ — यहाँ करुणा से भर जाना
  • पवन: हवा

8. अभ्यास

अभ्यास 1: पठित कविता — बोध

  1. 'पहली बूँद' कविता में बूँद को किस प्रकार चित्रित किया गया है?
  2. बूँद 'उमंग से' क्यों चली?
  3. हवा ने बूँद को रोकने का प्रयास किया — पर बूँद ने क्या किया?

अभ्यास 2: अलंकार-पहचान

  1. मानवीकरण अलंकार की परिभाषा लिखिए।
  2. कविता से मानवीकरण अलंकार के दो उदाहरण खोजिए।

अभ्यास 3: चर्चा

"क्या प्रकृति की हर छोटी चीज़ — जैसे एक बूँद, एक पत्ता, एक किरण — हमें कुछ सिखा सकती है?"


9. हल किए गए उदाहरण

उदाहरण 1: मानवीकरण अलंकार की पहचान

प्रश्न: "देख धरा की प्यास, वह द्रवित हुई" — यहाँ कौन-सा अलंकार है?

उत्तर: यहाँ मानवीकरण अलंकार है क्योंकि — (1) बूँद (निर्जीव) को 'देखना' और 'द्रवित होना' जैसी मानवीय क्रियाएँ और भावनाएँ दी गई हैं। (2) 'द्रवित होना' (करुणा से पिघलना) एक विशुद्ध मानवीय भावना है। (3) निर्जीव वस्तु में मानवीय गुणों का आरोपण ही मानवीकरण है।


10. निष्कर्ष

'पहली बूँद' हमें सिखाती है कि कवि की दृष्टि सामान्य लोगों से भिन्न होती है — जहाँ हमें बस बारिश की एक बूँद दिखती है, वहाँ कवि को उत्साह, प्रेम, करुणा और दृढ़ता की कहानी दिखती है। यही कविता का जादू है।

⚠️

Common mistakes & fixes

These are the exact errors that cost students marks in board exams. Read them once, save yourself the trouble.

WATCH OUT
Confusing मानवीकरण (Personification) with रूपक (Metaphor)
मानवीकरण में निर्जीव को जीवंत मानव की तरह दिखाया जाता है ('बूँद उमंग से चली')। रूपक में एक चीज़ को दूसरी चीज़ का रूप दे दिया जाता है ('चरण कमल' = चरण रूपी कमल)। मानवीकरण हमेशा मानवीय गुण देता है।
WATCH OUT
Reading the poem as just 'about rain' — missing the emotional layer
The poem is not a weather report. It is about EXCITEMENT, about the JOY of arrival, about how one small thing can transform a whole world. The drop's 'umang' (excitement) mirrors how we feel when something long-awaited finally happens.
WATCH OUT
Missing the contrast between 'gagan' (sky) and 'dhara' (earth)
The poem traces a journey — from the vast, impersonal sky to the warm, welcoming earth. The drop LEAVES the company of clouds ('jaladon ka sang') to FIND a new love on earth ('preeti nai'). This is a story of leaving the familiar to discover something new.

Practice problems

Try each one yourself before tapping "Show solution". Active recall > rereading.

Q1EASY· भावार्थ
'चली बूँद एक अति उमंग से' — इस पंक्ति का भावार्थ समझाइए।
Show solution
✦ उत्तर: इस पंक्ति में कवि बताता है कि वर्षा की पहली बूँद आकाश से अत्यधिक उत्साह और खुशी के साथ धरती की ओर चली। 'उमंग' शब्द दर्शाता है कि बूँद में भी एक जीवंत भावना है — वह धरती से मिलने को आतुर है। यह मानवीकरण अलंकार का सुंदर उदाहरण है।
Q2MEDIUM· अलंकार
'पहली बूँद' कविता में मानवीकरण अलंकार का प्रयोग कहाँ-कहाँ हुआ है? उदाहरण सहित समझाइए।
Show solution
Step 1 — मानवीकरण की परिभाषा: जब निर्जीव वस्तुओं या प्राकृतिक तत्वों को मानवीय भावनाओं, क्रियाओं और गुणों से युक्त दिखाया जाए। Step 2 — उदाहरण 1: 'चली बूँद एक अति उमंग से' — बूँद (निर्जीव) का 'उमंग' (मानवीय भाव) के साथ चलना। Step 3 — उदाहरण 2: 'लगी गगन से धरती बन ठनी' — बूँद का 'बन-ठनकर' आना — जैसे कोई दुल्हन सज-धजकर आ रही हो। Step 4 — उदाहरण 3: 'धरा पर प्रीति नई कुछ जगी' — धरती (निर्जीव) में 'प्रीति' (प्रेम) का जागना — एक विशुद्ध मानवीय भावना। ✦ उत्तर: मानवीकरण अलंकार के तीन प्रमुख उदाहरण — बूँद का उमंग से चलना, बन-ठनकर आना, और धरती में प्रीति जागना।

5-minute revision

The whole chapter, distilled. Read this the night before the exam.

  • कवि: अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' (1865-1947) — खड़ी बोली हिंदी के प्रारंभिक कवियों में से एक
  • प्रमुख अलंकार: मानवीकरण — बूँद को जीवंत मानवीय भावनाओं से युक्त दिखाना
  • केंद्रीय भाव: प्रकृति के हर छोटे तत्व का महत्व — एक बूँद भी धरती का जीवन बदल सकती है
  • प्रमुख पंक्तियाँ: 'चली बूँद एक अति उमंग से' और 'धरा पर प्रीति नई कुछ जगी'
  • शब्दार्थ: उमंग, गगन, बन ठनी, जलद, धरा

CBSE marks blueprint

Where the marks come from in this chapter — so you can plan your prep.

Where this shows up in the real world

This chapter isn't just an exam topic — it lives in the world around you.

जल संरक्षण की काव्यात्मक प्रेरणा

जब विद्यार्थी एक बूँद की इस काव्यात्मक यात्रा को पढ़ते हैं, तो वे समझते हैं कि पानी केवल एक संसाधन नहीं — यह जीवन का वाहक है। यह कविता जल संरक्षण के वैज्ञानिक पाठ को भावनात्मक गहराई देती है।

प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता

कविता सिखाती है कि प्रकृति का हर तत्व — चाहे कितना भी छोटा — सुंदर और महत्वपूर्ण है। यह दृष्टिकोण पर्यावरण-संरक्षण की नींव है।

Exam strategy

Battle-tested tips from teachers and toppers for this chapter.

  1. मानवीकरण अलंकार के उदाहरण हूबहू याद करें — 'चली बूँद एक अति उमंग से' सबसे स्पष्ट उदाहरण है।
  2. कवि का पूरा नाम: अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' — 'हरिऔध' भाग कोट में याद रखें।

Questions students ask

The real ones — pulled from the Q&A community and tutor sessions.

मानवीकरण में किसी निर्जीव वस्तु में मानवीय गुण, भावनाएँ या क्रियाएँ आरोपित की जाती हैं — जैसे 'बूँद उमंग से चली' (बूँद में उमंग नहीं होती, यह मानवीय भाव है)। रूपक में एक वस्तु को दूसरी वस्तु का पूर्ण रूप दे दिया जाता है — जैसे 'चरण कमल' (चरण ही कमल हैं)। मानवीकरण हमेशा मानव से जुड़ा होता है; रूपक किसी भी दो वस्तुओं के बीच हो सकता है।

कवि का वास्तविक नाम अयोध्या सिंह उपाध्याय है। 'हरिऔध' उनका उपनाम (pen name) है। वे खड़ी बोली हिंदी के प्रारंभिक और प्रमुख कवियों में से एक थे। उनकी प्रसिद्ध रचना 'प्रिय प्रवास' हिंदी का पहला महाकाव्य माना जाता है।
Verified by the tuition.in editorial team
Last reviewed on 1 June 2026. Written and reviewed by subject-matter experts — read about our process.
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