By the end of this chapter you'll be able to…

  • 1Explain the memoir genre — how personal experience becomes universal social commentary
  • 2Identify the chain of events: theft → suspicion on Gol → the narrator's intervention → truth revealed
  • 3Analyze why suspicion fell on Gol — unpack the class prejudice operating in the story
  • 4Describe the narrator's role: why she stood up for Gol when others didn't
  • 5Connect 'Gol' to 'Ek Daud Aisi Bhi' — how both texts portray struggle against social bias
  • 6Write a reflective paragraph: 'Have I ever judged someone unfairly based on how they looked or where they came from?'
💡
Why this chapter matters
Mridula Garg's 'Gol' is not just a memoir — it is a quiet, devastating critique of how society judges people by their class, not their character. When a theft occurs in the office, suspicion falls on Gol (Golden), the gardener's son — not because of evidence, but because he is poor, because he is 'that kind' of person in the eyes of the powerful. The memoir forces students to confront an uncomfortable truth: prejudice is not always loud and violent; sometimes it is silent, automatic, and accepted as 'common sense.' The supplementary reading 'Ek Daud Aisi Bhi' extends this theme — showing that those on the margins must run twice as hard to be seen. For Class 6 students beginning to notice social inequality, this chapter is a mirror and a lesson.

Before you start — revise these

A 5-minute refresher here will save you 30 minutes of confusion below.

गोल — कक्षा 6 हिंदी (मल्हार)

"गोल का मतलब सिर्फ गोल नहीं, बल्कि कुछ और भी है।" — मृदुला गर्ग

1. पाठ के बारे में

'गोल' प्रसिद्ध हिंदी लेखिका मृदुला गर्ग का एक मार्मिक संस्मरण है। यह किसी बड़े ऐतिहासिक व्यक्ति की नहीं — एक साधारण माली के बेटे गोल्डन (गोल) की कहानी है, जिस पर चोरी का झूठा आरोप लगता है। इस संस्मरण के माध्यम से लेखिका समाज में व्याप्त पूर्वाग्रह, वर्ग-भेद और न्याय के गंभीर प्रश्न उठाती हैं।

यह पाठ क्यों महत्वपूर्ण है

  • संस्मरण विधा का परिचय — व्यक्तिगत अनुभव को सामाजिक संदेश में बदलना
  • बच्चों को पूर्वाग्रह (prejudice) की अवधारणा से परिचित कराता है
  • सिखाता है कि गरीबी अपराध नहीं — और न ही संदेह का आधार
  • पूरक पठन 'एक दौड़ ऐसी भी' — संघर्ष और असमानता पर एक और दृष्टि

2. लेखिका-परिचय

मृदुला गर्ग

  • समकालीन हिंदी साहित्य की प्रमुख लेखिका
  • उपन्यास, कहानी, नाटक और निबंध — सभी विधाओं में लेखन
  • सामाजिक विषयों, विशेषकर स्त्री-विमर्श और न्याय पर गहरी पकड़
  • प्रमुख रचनाएँ: 'चित्तकोबरा', 'अनित्य', 'कठगुलाब', 'मिलजुल मन'

3. संस्मरण (NCERT मल्हार पाठ्यपुस्तक से)

लेखिका एक कंपनी में कार्य करती थीं। वहाँ के माली का एक बेटा था जिसका नाम गोल्डन था — पर सब उसे प्यार से 'गोल' बुलाते थे। गोल बहुत मेहनती और ईमानदार लड़का था। वह कंपनी में छोटे-मोटे काम करता था और सब उसे पसंद करते थे।

एक दिन कंपनी से कुछ पैसे चोरी हो गए। सब कर्मचारियों में खलबली मच गई। बिना किसी प्रमाण के, बिना किसी जाँच के — सबकी नज़रें गोल पर जा टिकीं। क्यों? क्योंकि वह गरीब था। क्योंकि वह माली का बेटा था। क्योंकि समाज ने यह मान रखा है कि चोरी जैसा अपराध 'इसी तरह के लोग' करते हैं।

गोल बार-बार कहता रहा कि उसने चोरी नहीं की, लेकिन कोई उसकी बात सुनने को तैयार नहीं था। केवल लेखिका को लगा कि यह अन्याय है। उन्होंने गोल का पक्ष लिया। उन्होंने कहा — "बिना सबूत के किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।"

बाद में जब असली चोर पकड़ा गया, तब सबको अपनी गलती का एहसास हुआ। गोल बेकसूर था। पर क्या इस एहसास से गोल का अपमान मिट सकता था? क्या इससे समाज की वह सोच बदल सकती थी जो गरीब को देखते ही चोर समझ लेती है?

लेखिका इसी प्रश्न के साथ संस्मरण समाप्त करती हैं — और पाठक को सोचने पर मजबूर कर देती हैं।


4. पूरक पठन — 'एक दौड़ ऐसी भी'

इस पाठ के साथ एक अतिरिक्त पठन सामग्री 'एक दौड़ ऐसी भी' दी गई है। यह भी समाज के हाशिए पर खड़े लोगों के संघर्ष की कहानी है — एक ऐसे बच्चे की जो तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी लगन और मेहनत से सफलता प्राप्त करता है। यह 'गोल' के विषय को आगे बढ़ाती है — केवल अन्याय दिखाना नहीं, उससे लड़ने की प्रेरणा भी देना।


5. पात्र-परिचय

गोल (गोल्डन) — माली का बेटा

  • कंपनी के माली का मेहनती और ईमानदार बेटा
  • नाम 'गोल्डन' (सोना) — पर समाज के लिए वह केवल 'गोल' है, बेकार और तुच्छ
  • चोरी का झूठा आरोप — केवल इसलिए कि वह गरीब है
  • अंत में बेकसूर साबित — पर अपमान का दाग नहीं मिटता

लेखिका (मृदुला गर्ग)

  • कंपनी में कार्यरत, संवेदनशील और न्यायप्रिय महिला
  • जब सब गोल पर संदेह करते हैं, वह अकेली उसके पक्ष में खड़ी होती हैं
  • उनका हस्तक्षेप पाठक को सिखाता है — अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाना हर व्यक्ति का कर्तव्य है

6. पाठ का संदेश

संदेशपाठ में कैसे दर्शाया गया
पूर्वाग्रह से बचेंबिना प्रमाण के गोल पर संदेह — केवल इसलिए कि वह गरीब है
समान न्याय सबका अधिकारलेखिका का कहना — बिना सबूत के कोई दोषी नहीं
गरीबी अपराध नहींगोल का चरित्र — ईमानदार, मेहनती, फिर भी संदेह का शिकार
आवाज़ उठाने का साहसलेखिका अकेली खड़ी हुईं — भीड़ के विरुद्ध

7. हम क्या सीखते हैं

मूल्यकैसे
न्यायप्रियताहर व्यक्ति को समान न्याय का अधिकार — चाहे वह अमीर हो या गरीब
साहसअन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाना — भले ही आप अकेले हों
संवेदनादूसरों की पीड़ा को समझना और महसूस करना
आत्म-चिंतनक्या हमने भी कभी किसी को बिना जाने दोषी माना?

8. प्रमुख शब्दार्थ

  • संस्मरण: स्मृति पर आधारित साहित्यिक लेखन, व्यक्तिगत अनुभव को कलात्मक रूप में प्रस्तुत करना — memoir
  • पूर्वाग्रह: किसी व्यक्ति या समूह के बारे में बिना जानकारी के बनाई गई धारणा — prejudice
  • बेकसूर: निर्दोष — जिसने कोई अपराध या गलती न की हो
  • संवेदना: दूसरों की पीड़ा और स्थिति को समझने और महसूस करने की क्षमता
  • हस्तक्षेप: बीच में पड़ना, हस्तक्षेप करना — intervention
  • खलबली: हलचल, अफ़रा-तफ़री, शोर-शराबा

9. अभ्यास

अभ्यास 1: पठित संस्मरण — बोध

  1. गोल कौन था और वह क्या काम करता था?
  2. चोरी का संदेह गोल पर ही क्यों गया?
  3. लेखिका ने गोल का पक्ष क्यों लिया?
  4. असली चोर पकड़े जाने पर सबको क्या एहसास हुआ?

अभ्यास 2: चर्चा

कक्षा में चर्चा करें: "क्या हमने कभी किसी व्यक्ति को उसकी वेशभूषा, भाषा, या आर्थिक स्थिति के आधार पर गलत समझा है? हम अपने पूर्वाग्रह कैसे पहचान सकते हैं?"

अभ्यास 3: रचनात्मक लेखन

"यदि मैं गोल होता..." विषय पर 7-8 वाक्य लिखिए। जब आप पर झूठा आरोप लगा हो, तब आपको कैसा लगा?

अभ्यास 4: विधा-पहचान

संस्मरण और आत्मकथा में अंतर बताइए:

  • संस्मरण: ________ (संकेत: एक घटना पर केंद्रित)
  • आत्मकथा: ________ (संकेत: पूरे जीवन का वर्णन)

10. हल किए गए उदाहरण

उदाहरण 1: 'गोल' नाम का क्या महत्व है?

  • गोल का असली नाम 'गोल्डन' (सोना) है — कीमती, चमकीला, मूल्यवान
  • पर समाज उसे 'गोल' कहता है — जैसे वह कोई बेकार, तुच्छ वस्तु हो
  • यह नाम एक गहरी विडंबना है: गोल वास्तव में कीमती है (ईमानदार, मेहनती), पर समाज की नज़र में बेकार
  • 'गोल' का एक अर्थ 'चक्कर' भी है — जैसे समाज पूर्वाग्रह के चक्कर में घूमता रहता है, कभी बाहर नहीं निकलता

उदाहरण 2: लेखिका ने गोल का पक्ष क्यों लिया?

  • लेखिका ने देखा कि गोल पर बिना किसी प्रमाण के संदेह किया जा रहा था
  • संदेह का एकमात्र आधार उसकी गरीबी थी — जो न्याय का घोर उल्लंघन है
  • लेखिका जानती थीं कि चुप रहना भी अन्याय में सहभागी होना है
  • उन्होंने साहस दिखाया — भीड़ से अलग जाकर सच का साथ दिया

11. निष्कर्ष

'गोल' एक साधारण घटना का संस्मरण नहीं — यह हमारे समाज का दर्पण है। यह हमें दिखाता है कि हम कितनी आसानी से लोगों को उनकी आर्थिक स्थिति, वेशभूषा, या पृष्ठभूमि के आधार पर दोषी मान लेते हैं। मृदुला गर्ग का यह संस्मरण हर पाठक से प्रश्न करता है: क्या आपने कभी किसी 'गोल' के साथ अन्याय होते देखा? और तब आपने क्या किया?

⚠️

Common mistakes & fixes

These are the exact errors that cost students marks in board exams. Read them once, save yourself the trouble.

WATCH OUT
Reading 'Gol' as just a theft story — missing the social commentary
The theft is only the trigger. The real story is about WHO gets suspected and WHY. Focus on the word 'गोल' — it means 'round' (a cycle) but also symbolizes how society goes around in circles of prejudice, never breaking free.
WATCH OUT
Thinking the narrator is the hero who 'saved' Gol
The narrator did the right thing, but the story's deeper point is: why was Gol suspected in the first place? Why did the narrator have to 'save' him? The system itself is the problem — not just that one accusation.
WATCH OUT
Confusing memoir (संस्मरण) with autobiography (आत्मकथा)
A memoir focuses on ONE specific experience or period and its larger meaning. An autobiography covers the ENTIRE life. 'Gol' is a memoir — it zooms into one incident and extracts a social lesson from it.

Practice problems

Try each one yourself before tapping "Show solution". Active recall > rereading.

Q1EASY· पात्र-चित्रण
गोल का चरित्र-चित्रण कीजिए।
Show solution
✦ उत्तर: गोल (गोल्डन) कंपनी के माली का बेटा है। वह मेहनती, ईमानदार और सीधा-सादा लड़का है। उसका नाम 'गोल्डन' (सोना) है परंतु समाज उसे उसकी गरीबी के कारण 'गोल' कहकर पुकारता है — मानो उसका कोई मूल्य ही न हो। जब कंपनी में चोरी होती है तो बिना किसी प्रमाण के संदेह उसी पर जाता है — केवल इसलिए कि वह गरीब है। अंत में वह बेकसूर साबित होता है। गोल का चरित्र समाज के उस तबके का प्रतिनिधित्व करता है जिसे हमेशा संदेह की दृष्टि से देखा जाता है।
Q2MEDIUM· मूल्य-आधारित
'गोल' संस्मरण हमें समाज के बारे में क्या सिखाता है? क्या यह समस्या आज भी प्रासंगिक है?
Show solution
Step 1 — संस्मरण का संदेश: यह संस्मरण सिखाता है कि हम अक्सर लोगों को उनकी आर्थिक या सामाजिक स्थिति के आधार पर आँकते हैं। गरीब व्यक्ति पर चोरी का संदेह करना हमारी सोच का दोष है, उसका नहीं। Step 2 — आज की प्रासंगिकता: यह समस्या आज भी बहुत प्रासंगिक है। आज भी झुग्गी-बस्तियों में रहने वालों, कम पढ़े-लिखे लोगों, या निम्न जातियों के लोगों पर बिना प्रमाण के संदेह किया जाता है। घरेलू सहायिकाएँ, रिक्शा चालक, फेरीवाले — इन सबको अक्सर संदेह का सामना करना पड़ता है। Step 3 — समाधान: हमें अपने पूर्वाग्रहों को पहचानना होगा और हर व्यक्ति को समान न्याय और सम्मान देना होगा। ✦ उत्तर: 'गोल' सिखाता है कि पूर्वाग्रह और वर्ग-भेद हमारे समाज की गंभीर बीमारियाँ हैं जो आज भी मौजूद हैं। हमें हर व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के समान दृष्टि से देखना चाहिए।

5-minute revision

The whole chapter, distilled. Read this the night before the exam.

  • लेखिका: मृदुला गर्ग — समकालीन हिंदी लेखिका
  • विधा: संस्मरण — एक विशिष्ट घटना और अनुभव पर केंद्रित, सामाजिक संदेश के साथ
  • मुख्य पात्र: गोल (गोल्डन) — गरीब माली का ईमानदार बेटा
  • कथानक: कंपनी में चोरी → संदेह गोल पर → लेखिका का विरोध → गोल बेकसूर साबित
  • मुख्य संदेश: पूर्वाग्रह और वर्ग-भेद के विरुद्ध; समान न्याय का अधिकार
  • पूरक पठन: 'एक दौड़ ऐसी भी' — संघर्ष और असमानता पर एक और पाठ
  • शब्दार्थ: संस्मरण, पूर्वाग्रह, बेकसूर, संवेदना

CBSE marks blueprint

Where the marks come from in this chapter — so you can plan your prep.

Where this shows up in the real world

This chapter isn't just an exam topic — it lives in the world around you.

पूर्वाग्रह-मुक्त सोच का विकास

जब विद्यार्थी यह पाठ पढ़ते हैं, तो वे अपने स्वयं के पूर्वाग्रहों की जाँच करना सीखते हैं — क्या उन्होंने भी कभी किसी को उसकी वेशभूषा, भाषा, या आर्थिक स्थिति के आधार पर आँका है? यह आत्म-निरीक्षण जीवनभर काम आता है।

न्यायपालिका का मूल सिद्धांत

भारतीय कानून का मूल सिद्धांत है: 'दोष सिद्ध होने तक निर्दोष' (innocent until proven guilty)। 'गोल' यही सिखाता है — कानून और समाज दोनों को इसी सिद्धांत पर चलना चाहिए।

Exam strategy

Battle-tested tips from teachers and toppers for this chapter.

  1. संस्मरण की परिभाषा और 'गोल' में उसका उदाहरण — यह 1-mark या 2-mark का नियमित प्रश्न है।
  2. पूर्वाग्रह और वर्ग-भेद — इन शब्दों का अर्थ और पाठ में इनकी भूमिका स्पष्ट करें।
  3. लेखिका का नाम — मृदुला गर्ग — अवश्य याद रखें।

Questions students ask

The real ones — pulled from the Q&A community and tutor sessions.

आत्मकथा में लेखक अपने पूरे जीवन का वर्णन करता है — जन्म से लेकर वर्तमान तक। संस्मरण किसी एक विशेष घटना, व्यक्ति, या अनुभव पर केंद्रित होता है और उससे कोई बड़ा सामाजिक या भावनात्मक संदेश निकालता है। 'गोल' एक संस्मरण है क्योंकि यह एक विशिष्ट घटना (चोरी और उसके बाद की स्थिति) का वर्णन करके समाज में पूर्वाग्रह के बड़े प्रश्न पर प्रकाश डालता है।

यह एक गहरी विडंबना है। गोल्डन का अर्थ है 'सोने जैसा' — कीमती, चमकीला, मूल्यवान। परंतु समाज में उसे 'गोल' कहकर पुकारा जाता है, मानो वह बेकार और तुच्छ हो। उसका नाम बताता है कि वह वास्तव में कीमती है (ईमानदार, मेहनती), लेकिन समाज की नज़र में उसकी कोई कीमत नहीं — क्योंकि वह गरीब है। यही इस नाम का दुखद व्यंग्य है।

मृदुला गर्ग एक जानी-मानी हिंदी लेखिका हैं और उनके संस्मरण वास्तविक अनुभवों पर आधारित माने जाते हैं। चाहे यह घटना पूर्णतः सत्य हो या आंशिक रूप से कल्पना पर आधारित — इसका सामाजिक संदेश सत्य है। भारत में हर दिन हजारों 'गोल' अपनी गरीबी के कारण संदेह और अपमान का सामना करते हैं।
Verified by the tuition.in editorial team
Last reviewed on 1 June 2026. Written and reviewed by subject-matter experts — read about our process.
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