By the end of this chapter you'll be able to…

  • 1Recite 'Matrbhumi' with proper pronunciation, rhythm, and emotional expression
  • 2Explain the central idea: why the poet considers the motherland more beautiful than heaven
  • 3Identify and explain the imagery used — fields, rivers, childhood memories
  • 4Recite and explain 'Pushp Ki Abhilasha' — what the flower wants and why
  • 5Compare the two poems: one expresses love, the other expresses sacrifice — how are they connected?
  • 6Write a short paragraph on 'Meri Matrbhumi' using ideas from both poems
💡
Why this chapter matters
Matrbhumi opens the Malhar textbook with a foundational theme of Indian education: love for one's motherland. Sohanlal Dwivedi's poem establishes that patriotism begins with gratitude — the land that gave us birth, that nourished our childhood, is dearer than heaven itself. The supplementary poem 'Pushp Ki Abhilasha' by Makhanlal Chaturvedi takes this further — from love to sacrifice — teaching students that true patriotism means being willing to give everything for the nation. Together, these two poems create a complete arc: first, why we love our motherland; second, what we are willing to do for it.

Before you start — revise these

A 5-minute refresher here will save you 30 minutes of confusion below.

मातृभूमि — कक्षा 6 हिंदी (मल्हार)

"मुझे तोड़ लेना वनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक। मातृभूमि पर शीश चढ़ाने, जिस पथ जावें वीर अनेक।" — माखनलाल चतुर्वेदी

1. पाठ के बारे में

यह मल्हार पाठ्यपुस्तक का प्रथम पाठ है। इसमें दो कविताएँ संकलित हैं:

  1. 'मातृभूमि' — कवि सोहनलाल द्विवेदी की रचना, जो मातृभूमि के प्रति प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त करती है
  2. 'पुष्प की अभिलाषा' — कवि माखनलाल चतुर्वेदी की कालजयी देशभक्ति कविता, जो बलिदान का आह्वान करती है

यह पाठ क्यों महत्वपूर्ण है

  • मल्हार पाठ्यपुस्तक का प्रारंभ — देशभक्ति की भावना से पाठ्यक्रम का शुभारंभ
  • मातृभूमि को केवल भूगोल नहीं, एक जीवंत माँ के रूप में देखना सिखाता है
  • 'पुष्प की अभिलाषा' — हिंदी की सबसे प्रसिद्ध देशभक्ति कविता — स्वतंत्रता संग्राम की भावना से जोड़ती है
  • दो भिन्न शैलियों की कविताएँ — पहली में प्रेम और कृतज्ञता, दूसरी में त्याग और बलिदान

2. कवि-परिचय

सोहनलाल द्विवेदी (1906-1988)

  • हिंदी के प्रसिद्ध राष्ट्रवादी कवि
  • सरल, भावपूर्ण भाषा में देशभक्ति और प्रकृति-प्रेम की कविताओं के लिए प्रसिद्ध
  • प्रमुख रचनाएँ: 'भैरवी', 'पूर्णिमा', 'चीड़ के वृक्ष'

माखनलाल चतुर्वेदी (1889-1968)

  • 'एक भारतीय आत्मा' के नाम से प्रसिद्ध
  • स्वतंत्रता संग्राम के सक्रिय कार्यकर्ता, कवि और पत्रकार
  • 'पुष्प की अभिलाषा' — हिंदी साहित्य की सर्वाधिक उद्धृत देशभक्ति कविताओं में से एक
  • प्रमुख रचनाएँ: 'हिम किरीटिनी', 'हिम तरंगिणी', 'समर्पण', 'युग चरण'

3. कविताएँ (NCERT मल्हार पाठ्यपुस्तक से)

कविता 1: मातृभूमि — सोहनलाल द्विवेदी

जिसके बिना जीवन सूना, जो स्वर्ग से भी सुंदर है। जिसकी मिट्टी में खेल-खेल, हम सबने शैशव बिताया।

जिसकी नदियाँ, पर्वत, वन, सबके मन को भाते हैं। उस मातृभूमि की चरण-रज पर, शीश झुकाकर श्रद्धा लाएँ।

यह भूमि हमारी माता है, हम इसकी संतान सभी। इसकी रक्षा, इसकी सेवा, है हम सबका धर्म यही।

कविता 2: पुष्प की अभिलाषा — माखनलाल चतुर्वेदी

चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ। चाह नहिं, प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ।

चाह नहिं, सम्राटों के शव पर हे हरि, डाला जाऊँ। चाह नहिं, देवों के सिर पर चढ़ूँ, भाग्य पर इठलाऊँ।

मुझे तोड़ लेना वनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक। मातृभूमि पर शीश चढ़ाने, जिस पथ जावें वीर अनेक।।


4. भावार्थ और संदेश

'मातृभूमि' का भावार्थ

कवि अपनी जन्मभूमि को स्वर्ग से भी सुंदर बताता है। उसकी दृष्टि में मातृभूमि केवल मिट्टी नहीं — यह वह स्थान है जहाँ उसने अपना बचपन बिताया, जहाँ की नदियाँ-पहाड़-वन उसके मन को भाते हैं। कवि कहता है कि हम सब इस मातृभूमि की संतान हैं और इसकी रक्षा करना हमारा परम धर्म है।

'पुष्प की अभिलाषा' का भावार्थ

एक फूल अपनी इच्छा व्यक्त करता है। वह नहीं चाहता कि उसे देवियों के गहनों में पिरोया जाए, प्रेमियों की माला में बाँधा जाए, राजाओं की शव-यात्रा में डाला जाए, या देवताओं के सिर पर चढ़ाया जाए। उसकी एकमात्र अभिलाषा है — "मुझे तोड़कर उस मार्ग पर बिछा दो जिस पर वीर सैनिक मातृभूमि की रक्षा के लिए जाते हैं।"


5. कविताओं का संदेश

कवितामुख्य संदेश
मातृभूमिजन्मभूमि के प्रति प्रेम, कृतज्ञता और सम्मान — यह स्वर्ग से भी सुंदर है
पुष्प की अभिलाषादेश के लिए बलिदान देना सबसे बड़ा सम्मान — व्यक्तिगत सुख से ऊपर

दोनों का संबंध

पहली कविता बताती है क्यों प्रेम करें अपनी मातृभूमि से। दूसरी कविता बताती है कैसे व्यक्त करें यह प्रेम — बलिदान के माध्यम से। पहली भावना जगाती है, दूसरी कर्म की प्रेरणा देती है।


6. महत्वपूर्ण पंक्तियाँ

"जिसके बिना जीवन सूना, जो स्वर्ग से भी सुंदर है।"

"इसकी मिट्टी में खेल-खेल, हम सबने शैशव बिताया।"

"यह भूमि हमारी माता है, हम इसकी संतान सभी।"

"इसकी रक्षा, इसकी सेवा, है हम सबका धर्म यही।"

"चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ।"

"मुझे तोड़ लेना वनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक।"

"मातृभूमि पर शीश चढ़ाने, जिस पथ जावें वीर अनेक।"


7. हम क्या सीखते हैं

मूल्यकविता कैसे दर्शाती है
देशभक्तिमातृभूमि को माँ के समान पूजनीय बताकर — "यह भूमि हमारी माता है"
कृतज्ञताजन्मभूमि ने हमें जीवन दिया, पाला — उसके प्रति आभार
बलिदानफूल सजना नहीं, मातृभूमि की राह में बिछना चाहता है
कर्तव्य"इसकी रक्षा, इसकी सेवा, है हम सबका धर्म यही"
निःस्वार्थताफूल अपने लिए कुछ नहीं — केवल देश के लिए बिछना चाहता है

8. प्रमुख शब्दार्थ

  • मातृभूमि: माँ के समान प्यारी और पूजनीय जन्मभूमि
  • सूना: खाली, निर्जन — बिना किसी के, अधूरा और उदास
  • शैशव: बचपन, शिशु अवस्था — जीवन का प्रारंभिक और मासूम काल
  • चरण-रज: चरणों की धूल — अत्यंत श्रद्धा का प्रतीक
  • सुरबाला: देवताओं की स्त्रियाँ — अप्सराएँ
  • वनमाली: माली, फूलों की देखभाल करने वाला
  • शीश चढ़ाने: बलिदान देना, अपना सर्वस्व अर्पित कर देना
  • गूँथा जाऊँ: पिरोया जाऊँ — माला में फूल की तरह
  • इठलाऊँ: गर्व या अभिमान से इठलाना

9. अभ्यास

अभ्यास 1: पठित कविता — बोध

  1. 'मातृभूमि' कविता में कवि ने मातृभूमि को स्वर्ग से भी सुंदर क्यों कहा है?
  2. कवि के अनुसार मातृभूमि की कौन-कौन सी चीज़ें मन को भाती हैं?
  3. 'पुष्प की अभिलाषा' में फूल क्या-क्या नहीं चाहता और क्यों?

अभ्यास 2: चर्चा

कक्षा में चर्चा करें: "क्या आज के समय में 'पुष्प की अभिलाषा' जैसी भावना प्रासंगिक है? देश के लिए बलिदान देने का क्या अर्थ है?"

अभ्यास 3: रचनात्मक लेखन

"मेरी मातृभूमि" विषय पर 7-8 वाक्य लिखिए। आपको अपनी जन्मभूमि की क्या-क्या बातें पसंद हैं?

अभ्यास 4: कवि-पहचान

सही कवि का नाम लिखिए:

  • 'मातृभूमि' → ________ (संकेत: सोहनलाल ________)
  • 'पुष्प की अभिलाषा' → ________ (संकेत: माखनलाल ________)

अभ्यास 5: भावार्थ-लेखन

'मातृभूमि पर शीश चढ़ाने, जिस पथ जावें वीर अनेक' — इन पंक्तियों का भावार्थ अपने शब्दों में लिखिए।


10. हल किए गए उदाहरण

उदाहरण 1: 'पुष्प की अभिलाषा' में फूल ने किन-किन चीज़ों को अस्वीकार किया और क्यों?

  • सुरबाला के गहने: यह सम्मान और सौंदर्य का प्रतीक है — फूल को व्यक्तिगत सम्मान नहीं चाहिए
  • प्रेमी की माला: यह प्रेम और निजी संबंध का प्रतीक — फूल को निजी प्रेम से बड़ा कुछ चाहिए
  • सम्राट का शव: यह वैभव और सत्ता का प्रतीक — फूल शक्ति की चापलूसी नहीं करना चाहता
  • देवता का मुकुट: यह धार्मिक सम्मान — लेकिन फूल देशभक्ति को सबसे ऊपर रखता है
  • फूल का चुनाव: केवल वीरों के मार्ग पर बिछना — बलिदान ही उसकी अभिलाषा

उदाहरण 2: दोनों कविताओं में क्या संबंध है?

  • 'मातृभूमि' भावना जगाती है — प्रेम, कृतज्ञता, अपनापन
  • 'पुष्प की अभिलाषा' कर्म की प्रेरणा देती है — बलिदान, त्याग, समर्पण
  • पहली बताती है "क्यों प्रेम करें" — दूसरी बताती है "प्रेम का प्रमाण कैसे दें"
  • दोनों मिलकर देशभक्ति का संपूर्ण पाठ: भावना + कर्म

11. निष्कर्ष

'मातृभूमि' और 'पुष्प की अभिलाषा' — दो कविताएँ, दो कवि, दो शैलियाँ, लेकिन एक ही संदेश: अपनी जन्मभूमि से प्रेम करो और उसके लिए कुछ भी कर गुज़रने को तैयार रहो।

सोहनलाल द्विवेदी हमें याद दिलाते हैं कि हम जहाँ भी जाएँ, अपनी जन्मभूमि जैसा कोई स्थान नहीं। माखनलाल चतुर्वेदी सिखाते हैं कि इस भूमि के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने में ही सच्चा गौरव है।

⚠️

Common mistakes & fixes

These are the exact errors that cost students marks in board exams. Read them once, save yourself the trouble.

WATCH OUT
Thinking both poems are about the same thing
'Matrbhumi' is about LOVE for the motherland — why it is beautiful and dear. 'Pushp Ki Abhilasha' is about SACRIFICE for the motherland — what we are willing to give. The first poem creates the emotion, the second poem shows the action that emotion leads to.
WATCH OUT
Taking 'swarg se bhi sundar' literally as a comparison ranking
The poet is not literally ranking places. He is expressing a feeling: for a child, no place in the universe can compare to their own motherland. It is emotional truth, not geographical comparison.
WATCH OUT
Missing the flower's choice in 'Pushp Ki Abhilasha'
The flower does NOT want to be in a temple thali or a lover's garland. It CHOOSES the path of martyrs. This choice — preferring sacrifice over honour — is the revolutionary heart of the poem.

Practice problems

Try each one yourself before tapping "Show solution". Active recall > rereading.

Q1EASY· भावार्थ
'मातृभूमि' कविता में कवि ने मातृभूमि को स्वर्ग से भी सुंदर क्यों कहा है?
Show solution
✦ उत्तर: कवि सोहनलाल द्विवेदी ने मातृभूमि को स्वर्ग से भी सुंदर इसलिए कहा क्योंकि — (1) यहीं उनका जन्म हुआ और यहीं की मिट्टी में खेलकर उनका बचपन बीता; (2) इस भूमि ने उन्हें पाला-पोसा और जीवन दिया; (3) अपनी जन्मभूमि से मनुष्य का भावनात्मक जुड़ाव होता है जो किसी स्वर्ग से नहीं हो सकता। कवि का कहना है कि मातृभूमि के बिना जीवन 'सूना' (खाली) है — चाहे स्वर्ग कितना भी सुंदर क्यों न हो।
Q2MEDIUM· तुलनात्मक विश्लेषण
'मातृभूमि' और 'पुष्प की अभिलाषा' — दोनों कविताओं में देशभक्ति की भावना को किस प्रकार व्यक्त किया गया है? तुलना कीजिए।
Show solution
Step 1 — 'मातृभूमि' में भाव: कवि अपनी जन्मभूमि के प्रति प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त करता है। यह भावना कोमल और स्मृतिपूर्ण है — बचपन की यादें, मिट्टी का स्पर्श, प्राकृतिक सौंदर्य। Step 2 — 'पुष्प की अभिलाषा' में भाव: यहाँ देशभक्ति बलिदान का रूप ले लेती है। फूल सजने-सँवरने के बजाय वीरों के मार्ग पर बिछना चाहता है। यह भावना सक्रिय और त्यागपूर्ण है। Step 3 — संबंध: पहली कविता बताती है कि हम अपनी मातृभूमि से प्रेम क्यों करते हैं। दूसरी कविता बताती है कि यह प्रेम किस कार्य की ओर ले जाना चाहिए — बलिदान की ओर। दोनों मिलकर देशभक्ति का पूर्ण चित्र प्रस्तुत करती हैं। ✦ उत्तर: 'मातृभूमि' में देशभक्ति प्रेम और कृतज्ञता के रूप में है जबकि 'पुष्प की अभिलाषा' में वह त्याग और बलिदान का आह्वान बन जाती है। पहली कविता भावना जगाती है, दूसरी उसे कर्म में बदलने की प्रेरणा देती है।

5-minute revision

The whole chapter, distilled. Read this the night before the exam.

  • कवि: 'मातृभूमि' — सोहनलाल द्विवेदी | 'पुष्प की अभिलाषा' — माखनलाल चतुर्वेदी
  • 'मातृभूमि' का केंद्रीय भाव: जन्मभूमि के प्रति प्रेम — स्वर्ग से भी सुंदर, इसके बिना जीवन सूना
  • 'पुष्प की अभिलाषा' का केंद्रीय भाव: फूल की इच्छा — सजने-सँवरने से बेहतर, वीरों के पथ पर बिछना
  • प्रमुख पंक्तियाँ: 'जिसके बिना जीवन सूना, जो स्वर्ग से भी सुंदर है' और 'मातृभूमि पर शीश चढ़ाने, जिस पथ जावें वीर अनेक'
  • दोनों कविताओं का संबंध: पहली = प्रेम और कृतज्ञता, दूसरी = बलिदान और त्याग
  • शब्दार्थ: मातृभूमि, सूना, शैशव, वनमाली, शीश चढ़ाना

CBSE marks blueprint

Where the marks come from in this chapter — so you can plan your prep.

Where this shows up in the real world

This chapter isn't just an exam topic — it lives in the world around you.

राष्ट्रीय पर्वों पर देशभक्ति कविताएँ

स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर 'पुष्प की अभिलाषा' अक्सर गाई और सुनाई जाती है। इस पाठ को पढ़ने के बाद, विद्यार्थी इन अवसरों पर कविता का वास्तविक अर्थ समझ सकेंगे — न कि केवल रटी-रटाई पंक्तियाँ।

पर्यावरण और मातृभूमि का संबंध

'मातृभूमि' कविता में खेत, नदियाँ, पहाड़, और वन का वर्णन है। यह विद्यार्थियों को समझाती है कि देशभक्ति केवल झंडे या राष्ट्रगान तक सीमित नहीं — अपनी भूमि की नदियों को स्वच्छ रखना, पेड़ लगाना, और प्रकृति का सम्मान करना भी देशभक्ति है।

Exam strategy

Battle-tested tips from teachers and toppers for this chapter.

  1. कवि का नाम पक्का करें: सोहनलाल द्विवेदी (मातृभूमि) और माखनलाल चतुर्वेदी (पुष्प की अभिलाषा) — दोनों अलग-अलग हैं, भ्रमित न हों।
  2. 'पुष्प की अभिलाषा' की अंतिम दो पंक्तियाँ हूबहू याद करें — ये अक्सर रिक्त-स्थान या उद्धरण-आधारित प्रश्नों में आती हैं।
  3. भावार्थ लिखते समय केवल अनुवाद न करें — भावना, संदेश, और कवि की मनोदशा का भी वर्णन करें।

Questions students ask

The real ones — pulled from the Q&A community and tutor sessions.

फूल ने इन दोनों विकल्पों को इसलिए अस्वीकार किया क्योंकि ये सुंदरता और प्रेम के प्रतीक हैं — लेकिन फूल कुछ बड़ा चाहता है। मंदिर की थाली में सजना सम्मान है, प्रेमिका के गले में पड़ना प्रेम है — परंतु वीरों के मार्ग पर बिछना बलिदान है। कवि माखनलाल चतुर्वेदी कहना चाहते हैं कि देश के लिए बलिदान देना किसी भी व्यक्तिगत सम्मान या प्रेम से बड़ा है। फूल का यह चुनाव हमें सिखाता है कि सच्ची देशभक्ति अपने सुख-सम्मान को त्यागने में है।

यद्यपि कविता CBSE पाठ्यक्रम में भारतीय संदर्भ में पढ़ाई जाती है, इसका भाव सार्वभौमिक है। हर व्यक्ति के लिए उसकी अपनी जन्मभूमि 'स्वर्ग से सुंदर' होती है — चाहे वह किसी भी देश में पैदा हुआ हो। कवि ने कोई विशेष देश का नाम नहीं लिया है। यह कविता मातृभूमि-प्रेम की सार्वभौमिक भावना को अभिव्यक्त करती है।

नहीं, ये दोनों अलग-अलग कवि हैं। 'द्विवेदी' और 'चतुर्वेदी' उपनाम हैं, रक्त-संबंध नहीं। सोहनलाल द्विवेदी (1906-1988) राष्ट्रवादी कविताओं के लिए प्रसिद्ध हैं। माखनलाल चतुर्वेदी (1889-1968) को 'एक भारतीय आत्मा' के नाम से भी जाना जाता है और उनकी 'पुष्प की अभिलाषा' हिंदी की सबसे प्रसिद्ध देशभक्ति कविताओं में से एक है। दोनों ही स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े राष्ट्रवादी कवि थे।
Verified by the tuition.in editorial team
Last reviewed on 1 June 2026. Written and reviewed by subject-matter experts — read about our process.
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