By the end of this chapter you'll be able to…

  • 1Recite the pad with correct pronunciation, paying attention to Braj-influenced words
  • 2Explain the dramatic situation: Who is speaking? To whom? What is the accusation? What is the defense?
  • 3Identify the वात्सल्य रस (parental love sentiment) and explain how it is created
  • 4Describe Meerabai's place in Bhakti literature — her devotion to Krishna, her defiance of convention
  • 5Compare the image of Krishna here (child making excuses) with his image in other contexts (god, warrior, philosopher)
💡
Why this chapter matters
Meerabai's 'Maiya Main Nahin Makhan Khayo' is perhaps the most beloved Krishna-bhakti pad in the Hindi curriculum — and for good reason. It captures a universal moment: the child caught red-handed, making up innocent excuses, and the mother who sees through it all with love. The humor is gentle, the devotion is deep, and the language (Braj mixed with Rajasthani) introduces students to a rich literary dialect. For Class 6 students, this pad is an entry point into Bhakti poetry — not as dry history, but as living, laughing devotion. Meerabai herself — a 16th-century Rajput princess who defied social norms to devote herself to Krishna — is a figure of courage and conviction.

Before you start — revise these

A 5-minute refresher here will save you 30 minutes of confusion below.

मैया मैं नहिं माखन खायो — कक्षा 6 हिंदी (मल्हार)

"मैया मैं नहिं माखन खायो, भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहिं पठायो।" — मीराबाई

1. पाठ के बारे में

यह पद भक्ति काल की महान कवयित्री मीराबाई का अत्यंत प्रिय और प्रसिद्ध पद है। इसमें बालक कृष्ण माँ यशोदा के सामने खड़े हैं — मुँह पर मक्खन लगा है, ग्वाल-बाल शिकायत कर चुके हैं, और कृष्ण अपनी मासूमियत भरी बहानेबाज़ी से माँ को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। यह दृश्य वात्सल्य रस का अनुपम उदाहरण है।

यह पाठ क्यों महत्वपूर्ण है

  • वात्सल्य रस का पाठ्यपुस्तक में सर्वोत्तम उदाहरण
  • मीराबाई — भारत की सबसे प्रसिद्ध कृष्ण-भक्त कवयित्री — से परिचय
  • ब्रज भाषा के सौंदर्य का अनुभव
  • बाल-मनोविज्ञान का काव्यात्मक चित्रण

2. कवयित्री-परिचय

मीराबाई (लगभग 1498-1546)

  • भक्ति काल की सर्वाधिक प्रसिद्ध कवयित्री
  • मेवाड़ (राजस्थान) के राजघराने में जन्म
  • बचपन से ही श्रीकृष्ण को अपना आराध्य और पति मान लिया
  • पति की मृत्यु के बाद राजमहल त्यागकर वृंदावन में कृष्ण-भक्ति में लीन
  • प्रमुख रचनाएँ: 'पदावली', 'राग गोविंद', 'गीत गोविंद की टीका'
  • भाषा: राजस्थानी, ब्रज और गुजराती का सुंदर मिश्रण

3. पद (NCERT मल्हार पाठ्यपुस्तक से)

मैया मैं नहिं माखन खायो। भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहिं पठायो।

चार पहर बंसी बट भटक्यो, साँझ परे घर आयो। मैं बालक बहियन को छोटो, छीको कैसे पायो।

तेरे मन भरम भयो जैसे, ये ग्वाल-बाल सब मेरे बैरी। जो तू जननी मन विचारौ, करौं तो कैसे चोरी।

माखन बिना रोटी सूखी, दधि बिना स्वाद न आवै। मीरा के प्रभु गिरिधर नागर, सुनिए मोरी मैया।।


4. भावार्थ

पहला भाग: मासूम बहाने

  • "मैया, मैंने मक्खन नहीं खाया!"
  • "सुबह-सुबह तुमने ही तो मुझे गायों के पीछे मधुबन भेज दिया था।"
  • "मैं तो चार पहर (आठ घंटे) बंसी बजाता वन में भटकता रहा, शाम को ही घर लौटा।"

दूसरा भाग: शिकायत का पलटवार

  • "मैं तो छोटा-सा बालक हूँ — इतनी ऊँचाई पर टँगा छीका (मक्खन रखने की टोकरी) मैं कैसे पा सकता हूँ?"
  • "तेरे मन में भ्रम है मैया — और ये सब ग्वाल-बाल मुझसे बैर रखते हैं, इसीलिए झूठी शिकायत करते हैं।"

अंतिम भाग: मीरा की भक्ति

  • अंतिम पंक्ति में मीराबाई कृष्ण को अपना 'प्रभु गिरिधर नागर' कहकर संबोधित करती हैं — यह कवयित्री की अपनी भक्ति-भावना है

5. वात्सल्य रस

  • स्थायी भाव: वत्सलता (स्नेह, ममता)
  • आश्रय: माँ यशोदा (जिसके मन में स्नेह है)
  • आलंबन: बालक कृष्ण (जिसके प्रति स्नेह है)
  • प्रभाव: पाठक के मन में ममता और हास्य का संचार

6. हम क्या सीखते हैं

मूल्यपद कैसे दर्शाता है
मातृ-प्रेमयशोदा जानती हैं कि कृष्ण झूठ बोल रहे हैं, फिर भी केवल प्रेम है
बाल-मनोविज्ञानबच्चे जब पकड़े जाते हैं तो बहाने बनाते हैं — यह स्वाभाविक है
भक्ति का आनंदमीरा के लिए कृष्ण की बाल-लीलाएँ भक्ति का विषय हैं

7. प्रमुख शब्दार्थ (ब्रज → हिंदी)

  • माखन: मक्खन
  • भोर: सुबह
  • गैयन: गायें
  • मोहिं: मुझे
  • पठायो: भेजा
  • बंसी बट: बाँसुरी बजाते हुए
  • साँझ: शाम
  • बहियन: बाँहों/भुजाओं
  • छीको: मक्खन रखने की ऊँची टँगी टोकरी
  • भरम: भ्रम — गलतफहमी
  • बैरी: दुश्मन, विरोधी
  • दधि: दही
  • गिरिधर नागर: गोवर्धन पर्वत धारण करने वाले श्रीकृष्ण

8. अभ्यास

  1. बालक कृष्ण ने माँ यशोदा के सामने क्या-क्या तर्क दिए?
  2. इस पद में कौन-सा रस प्रमुख है और क्यों?
  3. मीराबाई के जीवन की दो विशेष बातें लिखिए।
  4. ब्रज भाषा के पाँच शब्द और उनके हिंदी अर्थ लिखिए।

9. हल किए गए उदाहरण

उदाहरण: वात्सल्य रस की पहचान

प्रश्न: इस पद में वात्सल्य रस है — कैसे?

उत्तर: (1) स्थायी भाव 'वत्सलता' (ममता) है — यशोदा का कृष्ण के प्रति स्नेह। (2) यशोदा जानती हैं कि कृष्ण ने मक्खन चुराया है, पर उनके मन में क्रोध नहीं — केवल प्यार है। (3) कृष्ण की बहानेबाज़ी में बाल-सुलभ मासूमियत है जो पाठक के मन में ममता जगाती है। (4) अंतिम पंक्ति में मीरा की भक्ति भी वात्सल्य का ही एक रूप है।


10. निष्कर्ष

मीराबाई का यह पद सदियों से हर पीढ़ी के चेहरे पर मुस्कान लाता रहा है। बालक कृष्ण की मासूम बहानेबाज़ी, माँ यशोदा का मौन प्रेम, और मीरा की भक्ति — तीनों मिलकर इस पद को अमर बनाते हैं। यह पद सिखाता है कि भक्ति केवल गंभीरता नहीं — प्रेम, हास्य और आनंद भी है।

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Common mistakes & fixes

These are the exact errors that cost students marks in board exams. Read them once, save yourself the trouble.

WATCH OUT
Reading this as merely a cute children's poem — missing the Bhakti dimension
The pad is delightful on the surface, but it is also deep Bhakti poetry. Meerabai, writing this, is not just telling a story — she is entering into the divine relationship. When she writes Krishna's words, she IS Krishna. This is bhakti: the dissolution of the self into the beloved deity. The cuteness is the doorway; the devotion is the temple.
WATCH OUT
Confusing Meerabai's pad with Surdas's Krishna poetry
Both wrote about Krishna, but Surdas focused primarily on Krishna's childhood (वात्सल्य) while Meerabai's central theme was her own madhurya-bhakti (loving Krishna as her husband/lord). This specific pad happens to be about Krishna's childhood, which is why it resembles Surdas. But Meerabai's voice is distinct — more personal, more passionate.
WATCH OUT
Struggling with Braj words like 'मोहिं', 'गैयन', 'पठायो'
Braj Bhasha is a dialect of Hindi spoken in the Mathura-Vrindavan region. Many words are slightly different from standard Hindi: मोहिं = मुझे, गैयन = गायें, पठायो = भेजा, खायो = खाया। Make a small Braj-to-Hindi glossary for this pad and refer to it until the words become natural.

Practice problems

Try each one yourself before tapping "Show solution". Active recall > rereading.

Q1EASY· भावार्थ
बालक कृष्ण ने माँ यशोदा के सामने अपनी सफ़ाई में क्या तर्क दिए?
Show solution
✦ उत्तर: बालक कृष्ण ने तीन तर्क दिए: (1) 'भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहिं पठायो' — सुबह-सुबह ही तो तुमने मुझे गायों के पीछे मधुबन भेज दिया था, मैं तो सारा दिन वहीं था। (2) मैं तो दिनभर बाहर रहा — मक्खन कब खाता? (3) 'ये ग्वाल-बाल मुझसे बैर रखते हैं' — ये सब झूठ बोल रहे हैं, मुझसे जलते हैं।
Q2MEDIUM· रस-विश्लेषण
'मैया मैं नहिं माखन खायो' पद में वात्सल्य रस की अभिव्यक्ति कैसे हुई है?
Show solution
Step 1 — वात्सल्य रस की परिभाषा: माता-पिता और बच्चे के बीच के स्नेह, ममता और विनोद का भाव। इसका स्थायी भाव वत्सलता (स्नेह) है। Step 2 — दृश्य: माँ यशोदा ने कृष्ण को मक्खन चुराते पकड़ा। कृष्ण मासूमियत से बहाने बना रहे हैं। यह दृश्य ही वात्सल्य का है। Step 3 — माँ का पक्ष: यशोदा जानती हैं कि कृष्ण झूठ बोल रहे हैं, फिर भी उनके मन में केवल प्रेम और ममता है — क्रोध नहीं। यही वात्सल्य का सार है। Step 4 — बालक का पक्ष: कृष्ण के तर्क ('सुबह से बाहर हूँ', 'ग्वाल-बाल झूठ बोलते हैं') बाल-सुलभ मासूमियत और चालाकी का मिश्रण हैं — यह हास्य और वात्सल्य दोनों पैदा करता है। ✦ उत्तर: यशोदा का कृष्ण के प्रति बिना-शर्त स्नेह और कृष्ण की बाल-सुलभ बहानेबाज़ी — दोनों मिलकर वात्सल्य रस की सुंदर अभिव्यक्ति करते हैं।

5-minute revision

The whole chapter, distilled. Read this the night before the exam.

  • कवयित्री: मीराबाई (1498-1546 लगभग) — भक्ति काल की प्रमुख कवयित्री, कृष्ण की अनन्य भक्त
  • मीरा का जीवन: मेवाड़ राजघराने में जन्म, बचपन से कृष्ण-भक्ति, सांसारिक बंधन त्यागकर वृंदावन गमन
  • प्रमुख रस: वात्सल्य रस — माँ और बेटे के बीच का स्नेह और विनोद
  • दृश्य: यशोदा का आरोप (मक्खन चोरी) → कृष्ण की सफ़ाई (सुबह से मधुबन में, ग्वाल-बाल झूठे)
  • भाषा: ब्रज और राजस्थानी का सुंदर मिश्रण — मोहिं (मुझे), गैयन (गायें), पठायो (भेजा)
  • मीरा के अन्य प्रसिद्ध पद: 'पायो जी मैंने राम रतन धन पायो', 'बसो मोरे नैनन में नंदलाल'

CBSE marks blueprint

Where the marks come from in this chapter — so you can plan your prep.

Where this shows up in the real world

This chapter isn't just an exam topic — it lives in the world around you.

बाल-मनोविज्ञान का काव्यात्मक चित्रण

यह पद बच्चों के मनोविज्ञान को बखूबी पकड़ता है — जब बच्चा पकड़ा जाता है तो वह बहाने बनाता है, दूसरों पर दोष मढ़ता है, और मासूमियत का मुखौटा लगाता है। यह शिक्षकों और माता-पिता के लिए भी उतना ही शिक्षाप्रद है जितना विद्यार्थियों के लिए।

Exam strategy

Battle-tested tips from teachers and toppers for this chapter.

  1. वात्सल्य रस — परिभाषा (स्थायी भाव: वत्सलता) + इस पद से उदाहरण — यह जोड़ी हमेशा काम आएगी।
  2. मीराबाई का जीवन-परिचय — 4-5 वाक्यों में: काल, जन्म, विवाह, कृष्ण-भक्ति, राजमहल त्याग।
  3. ब्रज शब्दों का अर्थ: मोहिं, गैयन, पठायो, खायो — ये अक्सर शब्दार्थ में पूछे जाते हैं।

Questions students ask

The real ones — pulled from the Q&A community and tutor sessions.

मीराबाई का विवाह मेवाड़ के राजकुमार भोजराज से हुआ था। पति की मृत्यु के बाद राजघराने ने उनसे सती होने की अपेक्षा की, लेकिन मीरा ने इनकार कर दिया — उनके लिए तो कृष्ण ही उनके पति थे। राजपरिवार ने उन्हें मारने के कई प्रयास किए (ज़हर, साँप), लेकिन मीरा बच गईं। अंततः उन्होंने राजमहल छोड़ दिया और वृंदावन चली गईं जहाँ वे कृष्ण-भक्ति में लीन रहीं। उनका जीवन साहस, स्वतंत्रता और अटूट भक्ति की मिसाल है।

यह एक गहरा प्रश्न है। मीराबाई की भक्ति का एक रूप 'सखी-भाव' था — वे स्वयं को कृष्ण की सखी (सहेली) मानती थीं। इस पद में वे यशोदा और कृष्ण के दृश्य का वर्णन कर रही हैं — लेकिन एक सखी की तरह, जो कृष्ण की बाल-लीलाओं का आनंद ले रही है। वे दृश्य में सीधे उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उनकी भक्तिमयी दृष्टि हर पंक्ति में है।
Verified by the tuition.in editorial team
Last reviewed on 1 June 2026. Written and reviewed by subject-matter experts — read about our process.
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