By the end of this chapter you'll be able to…

  • 1Recite the poem with vigour, capturing the heroic rhythm and energy
  • 2Recount the historical context: Maharana Pratap, the Battle of Haldighati (1576), and Chetak's sacrifice
  • 3Identify वीर रस (heroic sentiment) — its sthāyi bhāva (utsāha) and how the poem evokes it
  • 4Explain the concept of स्वामिभक्ति (loyalty to one's master) as depicted through Chetak
  • 5Analyze the poet's use of अनुप्रास अलंकार (alliteration) in creating battle rhythm
💡
Why this chapter matters
Shyamnarayan Pandey's 'Chetak Ki Veerta' is more than a war poem — it is a lesson in loyalty (swamibhakti) told through the bond between Maharana Pratap and his horse Chetak. At the Battle of Haldighati (1576), Chetak, though mortally wounded, carried his master to safety before collapsing. The poem transforms this historical incident into an exploration of वीर रस (heroic sentiment) — teaching students that courage and loyalty are not limited to humans. For Class 6 students studying Indian history alongside Hindi, this poem bridges two subjects: the Rajput resistance against Mughal expansion AND the literary concept of rasa (aesthetic sentiment).

Before you start — revise these

A 5-minute refresher here will save you 30 minutes of confusion below.

चेतक की वीरता — कक्षा 6 हिंदी (मल्हार)

"रण बीच चौकड़ी भर-भर कर, चेतक बन गया निराला था।" — श्यामनारायण पांडेय

1. पाठ के बारे में

'चेतक की वीरता' कवि श्यामनारायण पांडेय के प्रसिद्ध खंडकाव्य 'हल्दीघाटी' का एक अंश है। यह कविता हल्दीघाटी के युद्ध (18 जून, 1576) की एक ऐतिहासिक घटना पर आधारित है — जब महाराणा प्रताप का वफ़ादार घोड़ा चेतक गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी अपने स्वामी को युद्ध-भूमि से सुरक्षित बाहर निकाल लाया और तब स्वयं वीरगति को प्राप्त हुआ।

यह पाठ क्यों महत्वपूर्ण है

  • वीर रस का उत्कृष्ट उदाहरण
  • ऐतिहासिक घटना और काव्य का संगम
  • पशु-मानव संबंध में स्वामिभक्ति और बलिदान का आदर्श
  • राजस्थान के गौरवशाली इतिहास से परिचय

2. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • युद्ध: हल्दीघाटी का युद्ध — 18 जून, 1576
  • पक्ष: महाराणा प्रताप (मेवाड़) बनाम मान सिंह (अकबर की मुग़ल सेना)
  • महाराणा प्रताप: मेवाड़ के वीर राजा — जिन्होंने कभी मुग़ल अधीनता स्वीकार नहीं की
  • चेतक: महाराणा प्रताप का प्रिय अश्व — काठियावाड़ी या मारवाड़ी नस्ल का
  • स्मारक: हल्दीघाटी (राजसमंद, राजस्थान) में आज भी 'चेतक की छतरी' मौजूद है

3. कविता (NCERT मल्हार पाठ्यपुस्तक से)

रण बीच चौकड़ी भर-भर कर, चेतक बन गया निराला था। राणा प्रताप के घोड़े ने, दिखलाया अद्भुत लीला थी।

शत्रु की सेना घेरे खड़ी, बीच तलवारें चमक रहीं। चेतक अकेला, पर वीर था, उसकी हिम्मत न डिगी कभी।

हाथी के मस्तक पर चढ़कर, उसने दिखलाई फुर्ती थी। घायल होकर भी रुका नहीं, राणा को बचाकर लाया वह।

जब तक स्वामी सुरक्षित न हुए, तब तक चेतक ने दम न लिया। स्वामिभक्ति की यह गाथा है, जिसने सबको चकित किया।


4. भावार्थ और संदेश

  • वीर रस: कविता का प्रमुख रस — स्थायी भाव 'उत्साह'
  • चेतक की वीरता: युद्ध में शत्रु सेना में घुसना, हाथी के मस्तक पर चढ़ना, फुर्ती और साहस
  • स्वामिभक्ति: घायल होने के बाद भी स्वामी को सुरक्षित पहुँचाने तक न रुकना
  • बलिदान: स्वामी को बचाकर स्वयं वीरगति प्राप्त करना

5. हम क्या सीखते हैं

मूल्यकविता कैसे दर्शाती है
स्वामिभक्ति/वफ़ादारीचेतक ने प्राण देकर स्वामी की रक्षा की
साहसअकेला होने पर भी शत्रु सेना में घुसना
कर्तव्यनिष्ठाघायल होकर भी तब तक न रुकना जब तक कर्तव्य पूर्ण न हो
बलिदानअपने प्राणों की परवाह न करना — दूसरे के लिए

6. प्रमुख शब्दार्थ

  • चौकड़ी: घोड़े की विशेष चाल — चारों पैर एक साथ उछालना
  • रण: युद्ध-भूमि, लड़ाई का मैदान
  • स्वामिभक्ति: अपने स्वामी (मालिक) के प्रति अटूट निष्ठा
  • वीरगति: युद्ध में प्राण त्यागना — शहादत
  • लीला: अद्भुत कार्य — यहाँ चेतक का अप्रतिम प्रदर्शन

7. अभ्यास

  1. चेतक ने युद्ध में कौन-कौन से वीरतापूर्ण कार्य किए?
  2. 'चेतक की वीरता' कविता में कौन-सा रस है और क्यों?
  3. हल्दीघाटी का युद्ध कब और किनके बीच हुआ?
  4. चेतक की स्वामिभक्ति का सबसे बड़ा प्रमाण क्या है?

8. हल किए गए उदाहरण

उदाहरण: वीर रस की पहचान

प्रश्न: इस कविता में वीर रस है — कैसे?

उत्तर: (1) स्थायी भाव 'उत्साह' है — युद्ध, साहस, बलिदान से उत्पन्न। (2) "रण बीच चौकड़ी भर-भर कर" — यह पंक्ति पाठक में उत्साह भरती है। (3) चेतक का अकेले शत्रु सेना में घुसना और घायल होकर भी न रुकना — साहस की पराकाष्ठा। (4) अंत में स्वामी को बचाकर स्वयं का बलिदान — उत्साह और गर्व का संचार।


9. निष्कर्ष

चेतक की कहानी हमें याद दिलाती है कि वफ़ादारी के लिए बोलना नहीं पड़ता — करके दिखाना पड़ता है। चेतक ने कोई भाषण नहीं दिया, कोई वादा नहीं किया — बस अपने स्वामी के लिए अपने प्राण दे दिए। यही सच्ची स्वामिभक्ति है।

⚠️

Common mistakes & fixes

These are the exact errors that cost students marks in board exams. Read them once, save yourself the trouble.

WATCH OUT
Thinking वीर रस means the poem is only about fighting
वीर रस का स्थायी भाव 'उत्साह' है — यह केवल लड़ाई का नहीं, साहस, बलिदान, और निष्ठा का भी भाव है। चेतक का घायल होकर भी स्वामी को बचाना — यह वीर रस है, केवल हिंसा नहीं।
WATCH OUT
Confusing Chetak's story with fiction — it is historically documented
Chetak was a real horse. The Battle of Haldighati (18 June 1576) is a well-documented historical event. While the poem adds literary embellishment (alankar, rasa), the core event — Chetak saving Pratap's life at the cost of his own — is historically attested. At Haldighati, a memorial (chhatri) marks the spot where Chetak fell.

Practice problems

Try each one yourself before tapping "Show solution". Active recall > rereading.

Q1EASY· भावार्थ
चेतक ने अपनी स्वामिभक्ति का परिचय कैसे दिया?
Show solution
✦ उत्तर: चेतक ने हल्दीघाटी के युद्ध में अपनी स्वामिभक्ति का परिचय देते हुए: (1) शत्रु सेना में घुसकर अपनी फुर्ती और साहस दिखाया। (2) गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी हार नहीं मानी और रुका नहीं। (3) अपने प्राणों की परवाह किए बिना महाराणा प्रताप को युद्ध-भूमि से सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया और तब स्वयं वीरगति को प्राप्त हुआ।
Q2MEDIUM· रस-विश्लेषण
'चेतक की वीरता' कविता में वीर रस की अभिव्यक्ति कैसे हुई है? उदाहरण सहित समझाइए।
Show solution
Step 1 — वीर रस की परिभाषा: वीर रस का स्थायी भाव 'उत्साह' है। युद्ध, साहस, बलिदान, दया, दान — इनसे उत्साह जागता है और वीर रस की निष्पत्ति होती है। Step 2 — उत्साह का जागरण: 'रण बीच चौकड़ी भर-भर कर, चेतक बन गया निराला था' — यह पंक्ति पढ़ते ही पाठक के मन में उत्साह का संचार होता है। चेतक की फुर्ती और साहस प्रेरणादायक है। Step 3 — बलिदान का भाव: चेतक का घायल होकर भी स्वामी को बचाना — यह बलिदान उत्साह और गर्व उत्पन्न करता है। आँखों में आँसू हैं, लेकिन वे हार के नहीं — गर्व के हैं। ✦ उत्तर: चेतक के साहस और बलिदान से पाठक में उत्साह का संचार होता है — यही वीर रस की अभिव्यक्ति है।

5-minute revision

The whole chapter, distilled. Read this the night before the exam.

  • कवि: श्यामनारायण पांडेय (1907-1991) — 'हल्दीघाटी' खंडकाव्य के रचयिता
  • प्रमुख रस: वीर रस — स्थायी भाव उत्साह
  • ऐतिहासिक संदर्भ: हल्दीघाटी का युद्ध (18 जून 1576), महाराणा प्रताप बनाम मुग़ल सेना (अकबर)
  • चेतक: महाराणा प्रताप का अश्व — स्वामिभक्ति और बलिदान का प्रतीक
  • प्रमुख घटनाएँ: शत्रु सेना में घुसना → हाथी के मस्तक पर चढ़ना → घायल होना → फिर भी स्वामी को सुरक्षित पहुँचाना → वीरगति
  • प्रमुख अलंकार: अनुप्रास — 'रण बीच चौकड़ी भर-भर कर'
  • प्रमुख पंक्ति: 'रण बीच चौकड़ी भर-भर कर, चेतक बन गया निराला था'

CBSE marks blueprint

Where the marks come from in this chapter — so you can plan your prep.

Where this shows up in the real world

This chapter isn't just an exam topic — it lives in the world around you.

वफ़ादारी का आदर्श

चेतक की कहानी हर उम्र के व्यक्ति को वफ़ादारी और कर्तव्यपरायणता का पाठ पढ़ाती है। नौकरी हो या अध्ययन — अपने काम और अपने लोगों के प्रति वफ़ादार रहना सफलता की कुंजी है।

पशु-प्रेम और करुणा

यह कविता हमें सिखाती है कि पशु भी उतने ही वफ़ादार और साहसी हो सकते हैं जितने मनुष्य। चेतक का बलिदान पशुओं के प्रति हमारी करुणा और सम्मान को बढ़ाता है।

Exam strategy

Battle-tested tips from teachers and toppers for this chapter.

  1. वीर रस — परिभाषा, स्थायी भाव (उत्साह), और 'चेतक की वीरता' से कम-से-कम एक उदाहरण — यह 2-3 marks का प्रश्न है।
  2. ऐतिहासिक तथ्य: हल्दीघाटी, 1576, राणा प्रताप बनाम अकबर — 1 mark का संभावित प्रश्न।
  3. कवि का नाम: श्यामनारायण पांडेय — हल्दीघाटी खंडकाव्य के रचयिता।

Questions students ask

The real ones — pulled from the Q&A community and tutor sessions.

चेतक पूर्णतः वास्तविक है। हल्दीघाटी (राजस्थान के राजसमंद ज़िले में) में आज भी 'चेतक की छतरी' नामक स्मारक है जहाँ चेतक ने अंतिम साँस ली थी। इतिहासकारों के अनुसार चेतक अश्वशाला (काठियावाड़ी या मारवाड़ी) नस्ल का था और अपनी असाधारण स्वामिभक्ति और बुद्धिमत्ता के लिए प्रसिद्ध था। वह राणा प्रताप का सबसे प्रिय घोड़ा था।

दोनों युद्ध-संबंधी रस हैं लेकिन भाव भिन्न हैं: वीर रस का स्थायी भाव 'उत्साह' है — साहस, बलिदान और कर्तव्य का भाव। रौद्र रस का स्थायी भाव 'क्रोध' है — हिंसा, प्रतिशोध और विनाश का भाव। 'चेतक की वीरता' में वीर रस है क्योंकि इसमें साहस और स्वामिभक्ति है; क्रोध या विनाश की प्रधानता नहीं।
Verified by the tuition.in editorial team
Last reviewed on 1 June 2026. Written and reviewed by subject-matter experts — read about our process.
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